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Saturday, December 4, 2010

बड़े परदे पर लखनऊ की कहानी-"कुछ लोग"

बड़े परदे अगले वर्ष लखनऊ की एक ऐसी कहानी सामने आएगी जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय की अन्तरात्मा की तलाश होगी। ‘कुछ लोग’ नामक यह फिल्म अल्पसंख्यक समुदाय के कु छ ऐसे बहादुर लोगों की कहानी होगी जो अपना परिचय समकालीन भारतीय समाज के विकल्प के तौर पर कराना चाहते हैं। फिल्म के निर्माता, निर्देशक और कलाकारों ने शुक्रवार को एक संयुक्त पत्रकार वार्ता में यह जानकारी दी। निर्माता हूरी अली खान, निर्देशक शुजा अली और फिल्म के कलाकारों आर्य बब्बर, गणेश वेंकटरमन, आरती ठाकुर एवं रज्जाक खान और संगीतकार समीर टण्डन ने बताया कि इस फिल्म की कहानी लखनऊ की पृष्ठभूमि पर आधारित है और इसका फिल्मांक न लखनऊ में अगले वर्ष फरवरी से आरम्भ होगा। फिल्म के जुलाई माह में प्रदर्शित होने की संभावना है। मूलत: लखनऊ के रहने वाले फिल्म निर्देशक शुजा अली ने बताया कि फिल्म 26/11 की सच्चाई के सिक्के के दूसरे पहलू को पेश करती है। यह कुछ उन कहानियों पर है जो देश के दूसरे भागों में घटित हो रहा था। एक ओर जहाँ आतंकवादी मुम्बई में लोगों की जान ले रहे थे वहीं कुछ अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जीवन बचाने में लगे थे। उन्होंने कहा कि इसमें 26/11 की घटनाएँ जरूर हैं लेकिन यह आतंकवादी हमले या आतंकवाद पर आधारित फिल्म नहीं है। फिल्म में अनुपम खेर, गुलशन ग्रोवर, रति अग्निहोत्री, टॉम आल्टर, नीलिमा अजीम है। आर्य ने कहा कि कुछ फिल्में व्यावसायिक फायदे के लिए बनाई जाती हैं जबकि यह फिल्म दिल के करीब है। दक्षिण की कई फिल्म कर चुके गणेश ने बताया कि मेरी पहली फिल्म कन्धार अगले वर्ष जनवरी में प्रदर्शित होगी(हिंदुस्तान,लखनऊ,4.12.2010)।
आतंकवाद के चलते देश के मुस्लिमों को शक की नजर से देखा जा रहा है। कहीं पर भी कुछ भी आतंकवादी घटना होती है तो तुरंत ही इलाके में रहने वाले मुस्लिम परिवार को भय के साथ जीने पर मजबूर होना पड़ता है। हालांकि उनकी कोई गलती नहीं होती, कुछ लोगों की वजह से उन्हें इस तरह डर कर जीना पड़ता है। इसी मुद्दे को लेकर पहली बार मुस्लिम निर्माता द्वारा भारतीय मुस्लिम और भारत के प्रति उनके विचारों को लेकर कुछ लोग फिल्म का निर्माण शुरू किया गया है।

हाल ही में मुंबई में इस फिल्म का भव्य मुहुर्त किया गया। मुहुर्त के मौके पर निर्माता-निर्देशक-लेखक महेश भट्ट विशेष रूप से उपस्थित थे। उन्होंने बताया जब मुझे यह कहानी सुनाई गई तो मुझे वह बहुत ही अच्छी लगी। वाकई अपने देश में कुछ लोगों की वजह से ही पूरा समाज बदनाम हो रहा है। फिर वह समाज हिंदुओं का हो या मुस्लिमों का। मुसलमानों के भारत के प्रति प्यार को कई फिल्मों में दिखाया है लेकिन उसमें उतनी गहराई नहीं थी जितनी इस फिल्म की कहानी में हैं। मेरा मानना है कि इस तरह की और फिल्में बननी चाहिए ताकि और कसाब तैयार होने से रोका जा सके।

कुछ लोग का निर्माण लखनऊ के सईद असीफ जाह और हूरी अली खान कर रहे हैं तो इसके प्रस्तुतकर्ता है मोहसीन अली खान और मिसाम अली खान। फिल्म में गुलशन ग्रोवर और अनुपम खेर मुख्य किरदारों में नजर आने वाले हैं। अन्य कलाकार हैं रती अग्निहोत्री, आर्य बब्बर, आरती ठाकुर, नीलिमा अजीम, टॉम अल्टर, रवी झंकाल, समीर धर्माधिकारी और रज्जाक खान। शूजा अली फिल्म के निर्देशक हैं। फिल्म की पूरी शूटिंग लखनऊ में की जाने वाली है(नई दुनिया,दिल्ली,4.12.2010)।

2 comments:

  1. सार्थक आलेख, साधुवाद...

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  2. Is aalekh mein ek alag kism ki jankari mili.Suchnaparak post.Plz. visit my new post.

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