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Saturday, May 21, 2011

पहली बार भोजपुरी सिनेमा के लिए अवॉर्ड

भोजपुरी सिनेमा के 50 साल पूरे होने पर मुंबई की ‘भोजपुरी सिटी‘ पत्रिका ने पहली बार भोजपुरी सिनेमा के लिए हर श्रेणी में अवॉर्ड देने की घोषणा मुंबई मे एक प्रेस कांफ्रेंस में की। ‘भोजपुरी मीडिया’ के प्रकाशन का यह चौथा वर्ष है और इस बीच पत्रिका ने न सिर्फ भोजपुरी, वरन पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बना ली है। उल्लेखनीय है कि 2 जून को होने वाले इस अवॉर्ड समारोह का मीडिया पार्टनर सहारा न्यूज नेटवर्क है। मंच से बोलते हुए समारोह के सव्रेसर्वा किशन खदरिया ने स्वीकार किया कि ‘सहारा इंडिया परिवार ने मुझे सही मायने में सहारा दिया है। आज मेरी खुशी का कोई ओर छोर नहीं है। हमारी पत्रिका प्रकाशन के चौथे वर्ष में प्रवेश कर गई है और आज भोजपुरी सिनेमा सौ करोड़ रुपए का कारोबार कर रहा है। वैसे तो मैं राजस्थानी हूं, लेकिन पता नहीं क्यों मुझे बिहार और भोजपुरी सिनेमा से प्यार हो गया है।’

मंच पर सहारा इंडिया परिवार का प्रतिनिधित्व श्री रूबल दत्ता ने किया। उन्होंने कहा, ‘सहारा इंडिया परिवार कामना करता है कि यह अवॉर्ड ट्रेंड सेटर बने।’ दीप प्रज्जवलन युवा अभिनेता आफताब शिवदासानी और अभिनेत्री अदिति गोवित्रीकर के हाथों संपन्न हुआ। इस मौके पर आफताब ने कहा, ‘मुझे पहली बार पता चला कि भोजपुरी सिनेमा को 50 वर्ष हो गए। आप पहली बार अवॉर्ड देने जा रहे हैं। मेरी कामना है कि भोजपुरी सिनेमा और आगे बढ़े। हिंदी में तो इतने सारे अवॉर्ड हैं कि हर अवॉर्ड का नाम भी याद नहीं रहता।’

भोजपुरी सिनेमा के लीजेंड कहे जानेवाले कलाकार राकेश पांडे ने भोजपुरी सिनेमा की यात्रा और दशा-दिशा पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि कैसे भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने चाहा था कि भोजपुरी सिनेमा का भी निर्माण हो। उनकी प्रेरणा से भारत की पहली भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मईया तोहे पियरी चढ़इबो’

सन् 1961 में बननी शुरू हुई और सन् 1962 में रिलीज हुई। इस फिल्म को बनाने में नजीर हुसैन साहब की महत्वपूर्ण भूमिका थी और उन्हीं की कहानी पर फिल्म बनी थी। इस फिल्म के निर्माता विश्वनाथ प्रसाद शाहाबादी और निर्देशक कुंदन कुमार थे। फिल्म में असीम कुमार, कुमकुम, हेलन और बेबी पद्मा खन्ना ने काम किया था। भोजपुरी की यह पहली ही फिल्म सुपर डुपर हिट हुई थी। कार्यक्रम समाप्त होने तक भोजपुरी सिनेमा के सुपर स्टार मनोज तिवारी भी पहुंच गए। उन्होंने पहुंचते ही अपने दिलकश अंदाज में कहा, ‘मैं तो हूट का हकदार हूं, क्योंकि मैं इतनी देर से आया। इस पर भी मेरा स्वागत हो रहा है जिससे मैं खुश हूं। मैं सिर्फ इतना ही कहूंगा कि भोजपुरी सिनेमा पर केंद्रित पत्रिका ‘भोजपुरी सिटी‘ को ही भोजपुरी सिनेमा के अवॉर्ड देने का हक है।’

‘भोजपुरी सिटी’ के संपादक अखिलेश ने बताया कि, ‘अब हम पूरी फिल्म इंडस्ट्री को रिप्रजेंट करने लगे हैं। हम दो प्रकार के अवॉर्ड देने जा रहे हैं। पहला जूरी अवॉर्ड और दूसरा पॉपुलर अवॉर्ड। यह अवॉर्ड जनवरी से दिसम्बर 2010 के बीच रिलीज हुई भोजपुरी फिल्मों में से प्रत्येक श्रेणी में दिया जाएगा।’

अंत में उदित नारायण, आफताब शिवदासानी, राकेश पांडे और अदिति गवित्रीकर के हाथों अवॉर्ड की ट्रॉफी का अनावरण किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि हिंदी फिल्मों के सफल गायक उदित नारायण ने अपना वक्तव्य शुद्ध भोजपुरी में दिया और उन्होंने एक पॉपुलर भोजपुरी गीत की दो पंक्तियां भी गाकर सुनाई जिस पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। इस कार्यक्रम में भोजपुरी सिनेमा के प्रमुख निर्देशक, कलाकार और निर्माता मौजूद थे(राष्ट्रीय सहारा,मुंबई,20.5.11)।

Friday, October 8, 2010

एक्सीलेंस इन सिनेमा अवार्ड गुलजार को

प्रख्यात गीतकार एवं फिल्म निर्माता गुलजार को इस साल साउथ एशियन सिनेमा फाउंडेशन की ओर से एक्सिलेंस इन सिनेमा अवार्ड प्रदान किया जाएगा। उन्हें यह अवार्ड 13 अक्टूबर को विशेष समारोह में ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त नलिन सूरी प्रदान करेंगे। साउथ एशियन सिनेमा के निदेशक ललित मोहन जोशी ने बताया कि भारतीय सिनेमा में अमूल्य योगदान के लिए उन्हें यह अवार्ड देने का निर्णय लिया गया है। फिल्म स्लमडॉग मिलियनेयर के गीत जय हो के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाले गुलजार इस समारोह में अपनी नई फिल्म इजाजत के प्रोमो भी जारी करेंगे। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर में अपनी चुनिंदा कविताओं का पाठ भी करेंगे। गीतों के अलावा 75 वर्षीय गुलजार ने कई फिल्मों का निर्देशन भी किया है। जिसमें अंगूर, नमकीन, परिचय जैसी मनोरंजक फिल्मों के अलावा राजनीतिक विषयों पर आधारित माचिस और आंधी जैसी फिल्में शामिल हैं। इससे पहले यह सम्मान अदूर गोपालकृष्णन, एमएस साथ्यू, सईद अख्तर मिर्जा और गिरीश कसारावल्ली को भी दिया जा चुका है।

Saturday, September 25, 2010

शहरयार को ज्ञानपीठ

उर्दू के नामचीन शायर और जाने-माने गीतकार अखलाक मुहम्मद खान शहरयार को 44वां ज्ञानपीठ पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। उन्हें यह पुरस्कार वर्ष 2008 के लिए दिया जाएगा। जाने-माने लेखक और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता डॉ. सीताकांत महापात्र की अध्यक्षता में ज्ञानपीठ चयन समिति की बैठक में शहरयार को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया गया। चयन समिति में प्रो. मैनेजर पांडे, डॉ. के. सच्चिदानंदन, प्रो. गोपीचंद नारंग, गुरदयाल सिंह, केशुभाई देसाई, दिनेश मिश्रा और रवींद्र कालिया शामिल थे। उर्दू के जाने-माने शायर शहरयार का जन्म 1936 में आंवला (बरेली, उत्तरप्रदेश) में हुआ। इस 74 वर्षीय शायर का पूरा नाम कुंवर अखलाक मुहम्मद खान है, लेकिन इन्हें इनके उपनाम शहरयार से ही ज्यादा पहचाना जाना जाता है। वर्ष 1961 में उर्दू में स्नातकोत्तर डिग्री लेने के बाद उन्होंने 1966 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में उर्दू के लेक्चरर के तौर पर काम शुरू किया। वह यहीं से उर्दू विभाग के अध्यक्ष के तौर पर सेवानिवृत्त भी हुए। बॉलीवुड की कई हिट हिंदी फिल्मों के लिए गीत लिखने वाले शहरयार को सबसे ज्यादा लोकप्रियता 1981 में आई उमराव जान से मिली। इस वक्त की उर्दू शायरी को गढ़ने में अहम भूमिका निभाने वाले शहरयार को उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, दिल्ली उर्दू पुरस्कार और फिराक सम्मान सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया।
शहरयार के मायने होते हैं बादशाह। आज ज्ञानपीठ पुरस्कार पाकर शहरयार वाकई में अदब की दुनिया के ताजदार हो गए। उनके लिखे फिल्मी गीत तीन दशक से लोगों की जुबान पर हैं। जदीद गजल और नज्म की गुफ्तगू शहरयार के जिक्र के बगैर अधूरी मानी जाती है। उर्दू दुनिया के मकबूल नाम शहरयार ने फिल्मों के लिए लिखी गजलों में रोमानी खयालात को भी इतने सलीके से बयां कर दिया कि वह जिंदगी का खास और सुखनवर हिस्सा महसूस होता है। हालांकि उनकी शायरी का कैनवास इंसानी जिंदगी की अंदरूनी घुटन के साथ ही समाजी मसाइल और उलझनों की बेहतरीन अक्काशी है। आजकल ताजदारे गजल अपने लख्ते जिगर के पास दुबई में हैं। सो फोन पर लंबी बात तो हो नहीं सकी। दैनिक जागरण से मुखतसर सी गुफ्तगू के दौरान उन्होंने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि मुल्क का सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार ज्ञानपीठ हासिल करना उनकी जिंदगी की अहम उपलब्धि है। उन्होंने ज्यूरी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा बड़े फख्रकी बात है। मौजूदा शायरी को किस शक्ल में देखते हैं? ज्यादातर शायर और साहित्यकार मौकापरस्त हो गए हैं। मंचों पर सांप्रदायिक शायरी कर लोगों के जज्बातों को कुरेदा जा रहा है। बस वक्ती तौर पर तालियां बटोरना मकसद रह गया है इनका। इस आबोहवा में समाज का हर फिरका भी मौकापरस्त हो गया है। हालात इस कदर बदतर हो गए है कि पूरी तस्वीर ही बदलने की जरूरत है। स्याह रात नहीं लेती नाम ढलने का। यही तो वक्त है सूरज तेरे निकलने का।। कहीं न सबको समंदर बहाके ले जाए। ये खेल खत्म करो कश्तियां बदलने का।। आप शुरुआत कीजिए सुधार की? मुझसे अकेले कुछ नहीं होगा। हालात इतने बदतर हैं कि पूरे समाज को इसकी पहल करनी पड़ेगी। अब रात की दीवार को ढहाना जरूरी है। ये काम मगर मुझसे अकेले नहीं होगा।। समझौता कोई ख्वाब बदले नहीं होगा। जो चाहती है दुनिया मुझसे अकेले नहीं होगा।।(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण/अलीगढ़,25.9.2010)।

Wednesday, September 15, 2010

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार घोषित

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का एक और पुरस्कार जीतकर आखिरकार अमिताभ बच्चन ने भी हिंदी का नाम ऊंचा कर दिया। अभी तक तमिल फिल्मों के अभिनेता कमल हासन और मलयालम फिल्मों के अभिनेता ममूटी ही ऐसे अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तीन-तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं। फिल्म पा में प्रोजेरिया से पीड़ित एक बच्चे के किरदार ने अमिताभ को उनके ६९वें जन्मदिन से पहले तोहफा दिया है। अमिताभ ने इस पुरस्कार को अपने प्रशंसकों को प्रति समर्पित किया है। अमिताभ के अलावा राजकुमार हीरानी और विधु विनोद चोपड़ा की भी हैट्रिक हुई है जिनकी फिल्म ३ इडियट्स को सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक फिल्म का पुरस्कार मिला है। इससे पहले इन दोनों की मुन्ना भाई सीरीज की दोनों फिल्में पुरस्कृत हुई हैं। राजकुमार हीरानी ने इसके लिए दर्शकों का शुक्रिया अदा किया, जबकि चोपड़ा ने इसे अपने प्रोडक्शन हाउस के लिए एक गौरवशाली क्षण बताया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के ऐलान से पहले ही मुंबई में सुबह से इस बात की चर्चा थी कि क्या १९८३ में पूनमपिराई, १९८८ में नायकन और १९९७ में इंडियन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाले कमल हासन एक और पुरस्कार जीतने में कामयाब रहेंगे या फिर १९९० में मथिलुकल व ओरु वडकन वीरगाथा, १९९४ में पोंथनमडा व विधेयन व १९९९ में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके ममूटी देश में चौथी बार ये पुरस्कार जीतने वाले पहले अभिनेता बन जाएंगे। लेकिन, मंगलवार की दोपहर बाद जब दिल्ली में इन पुरस्कारों का ऐलान हुआ तो भीड़ मुंबई में जलसा के बाहर उमड़ी। ६७ साल के एक अभिनेता को १३ साल के एक बच्चे का किरदार निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुना गया। इसी के साथ अमिताभ पहले ऐसे अभिनेता बन गए हैं जिन्हें हिंदी सिनेमा के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं। इससे पहले अमिताभ को १९९१ में फिल्म अग्निपथ और २००६ में ब्लैक के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिथुन चक्रवर्ती भी जीत चुके हैं, लेकिन उनका एक पुरस्कार हिंदी फिल्म मृगया के लिए और दूसरा बांग्ला फिल्म तहादेर कथा के लिए है। इस साल राष्ट्रीय पुरस्कारों में अगर प्रोडक्शन हाउस के लिहाज से देखा जाए तो अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस बिग पिक्चर्स ने सबसे ज्यादा १४ राष्ट्रीय पुरस्कार जीते हैं, जिसमें शाजी करु की फिल्म कुट्टी श्रांक (सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म समेत पांच पुरस्कार) व श्याम बेनेगल की वेल डन अब्बा (सर्वश्रेष्ठ सामाजिक फिल्म) भी शामिल हैं। राष्ट्रीय एकता के लिए सबसे अच्छी फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली दिल्ली ६ के निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने इस मौके पर कहा कि इस पुरस्कार ने सिनेमा के जरिए समाज को जोड़ने की हमारी कोशिश को सहारा दिया है(पंकज शुक्ल,नई दुनिया)।

Saturday, August 7, 2010

मराठी फिल्म 'विहिर' को जर्मन अवॉर्ड

बर्लिन और रोटरडम जैसे अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सवों में दिखाई जा चुकी मराठी फिल्म 'विहिर' ने जर्मनी के स्टुटगार्ट में 'जर्मन स्टार ऑफ इंडिया' अवॉर्ड जीता है। इस बाबत विहिर के डाइरेक्टर उमेश कुलकर्णी ने बताया कि इस फिल्म को पिछले हफ्ते स्टुटगार्ट फिल्म फेस्टिवल में उक्त अवार्ड से नवाजा गया।

कुलकर्णी के मुताबिक यह अवार्ड मिलने से फिल्म निर्माताओं को यह प्रेरणा मिलेगी कि अच्छी तथा अलग किस्म की फिल्में सभी का ध्यान जरूर खींचती हैं। उन्होंने बताया कि अवॉर्ड के तहत एक ट्रॉफी और चार हजार यूरो फिल्म को प्रदान किया गया है। ज्युरी के मुताबिक फिल्म के विविध पहलुओं (परिवार और मित्रता के दायरे तथा बेहतरीन अनुवाद) के आधार पर अवार्ड दिया गया है। दो चचेरे भाइयों की कहानी विहिर को 7 अगस्त को अहमदाबाद में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जाएगा। बाद में इस फिल्म का प्रदर्शन वरसाव, बेल्जियम और मेलबर्न में भी किया जाएगा(नभाटा,मुंबई,6.8.2010)।

आशा भोंसले दुनिया की 20 हस्तियों में शुमार

महान गायिका आशा भोसले का नाम दुनिया में संगीत की 20 शीर्ष हस्तियों में शामिल किया गया है। सीएनएन द्वारा तैयार पिछले 50 सालों की संगीत की शीर्ष हस्तियों की इस सूची में आशा भोसले के साथ बीटल्स, माइकल जैक्सन और रॉलिंग स्टोन्स जैसे नाम शामिल हैं। अमेरिकी न्यूज एजेंसी सीएनएन इन 20 हस्तियों में से शीर्ष पांच का चयन करने के लिए ऑनलाइन चुनाव करा रही है। इसका नतीजा 25 अगस्त को जारी किया जाएगा। सीएनएन ने आशा भोसले के बारे में कहा है, बॉलीवुड का सबसे चमकीला सितारा आशा भोसले पा‌र्श्वगायन की मलिका हैं। उन्होंने 800 से अधिक फिल्मों में दस हजार से ज्यादा गाने गाए हैं। गायन की विविधता से आशा ने अपने करियर के छह दशकों में स्टारडम की ऊंचाई हासिल की। बड़ी बहन लता मंगेशकर की छत्रछाया में पा‌र्श्वगायन प्रारंभ करने वाली आशा ने 1957 में दिलीप कुमार और वैजयंतीमाला अभिनीत नया दौर फिल्म के मांग के साथ तुम्हारा गीत से लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने अपने संगीतकार पति आर.डी. बर्मन के साथ कई हिट गाने दिए। ओ हसीना और पिया तू अब तो आजा जैसे आशा के सुपर हिट गीतों का संगीत बर्मन ने ही तैयार किया था। सीएनएन ने संगीत पत्रिका सांगलाइन के साथ मिलकर यह सूची तैयार की है। एरेथा फ्रैंकलिन, जेम्स ब्राउन, बॉब मार्ली, सेलिया क्रूज और सूफी गायक नुसरत फतेह अली खां इसमें शामिल अन्य संगीत हस्तियां हैं।

Friday, August 6, 2010

लता मंगेशकर अलंकरण से नवाजे जाएंगे रवि

संगीत के क्षेत्र में मध्य प्रदेश सरकार के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान लता मंगेशकर अलंकरण से मशहूर संगीतकार रवि को अक्टूबर में इंदौर में होने वाले समारोह में विभूषित किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि सुरों की मलिका की जन्मस्थली में होने वाले तीन दिवसीय समारोह के दौरान विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें संगीत जगत के कई सितारे अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

सुगम संगीत के क्षेत्र में कलात्मक श्रेष्ठता को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश का संस्कृति विभाग लता मंगेशकर अलंकरण प्रदान करता है। अब तक इस राष्ट्रीय सम्मान से नौशाद, किशोर कुमार और आशा भोंसले समेत 24 संगीत हस्तियों को नवाजा जा चुका है(हिंदुस्तान,6.8.2010)।

Wednesday, May 26, 2010

थाई फिल्म को कान का शीर्ष फिल्म पुरस्कार

फ्रांस में हुऐ 63वें कान्स फिल्म महोत्सव में थाइलैंड के निदेशक एपिचाटपोंग वरीरासेथाकुल की फिल्म ‘अंकल बोनमी हू कैन रिकाल हिज पास्ट लाइव्स’ ने सर्वोच्च पुरस्कार ‘पाम डी ओर’ जीत लिया है।
ज्यूरी द्वारा की गई इस घोषणा से समीक्षकों को तगड़ा झटका लगा है। उन्होंने जेवियर बेअवोइस की फिल्म ‘आफ गाड्स एंड मैन’ को खिताब का प्रबल दावेदार बताया था। इस फिल्म को महोत्सव का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पुरस्कार ग्रैंड प्राइज दिया गया। चाड के निर्देशक महामत सालेह हारून की फिल्म ‘ए स्क्रीमिंग मैन’ को विशेष ज्यूरी पुरस्कार दिया गया।
पुरस्कार जीतने के बाद वरीरासेथाकुल ने कहा, "मैं थाईलैंड के सभी पूर्वजों को धन्यवाद देना चाहूंगा। उन्होंने इसे यहां मेरे लिए संभव बनाया।”
मेक्सिको के अलेजेंड्रो की ‘ब्यूटीफुल’ में अभिनय के लिए स्पेन के कलाकार ज़ेवियर बारडेम को, इटली के इलिओ जरमेनो के साथ सर्वेश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से नवाजा गया है।
ईरान के अब्बास किआरोस्तामी की ‘सर्टिफाइड कॅापी’ में दुर्लभ चीजों की कारोबार करने वाली एक नाखुश व्यापारी की भूमिका निभाने वाली फ्रांस की जूलिएट बिनोचे को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुना गया है।
समीक्षक सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए बार्डेम का समर्थन कर रहे थे जबकि जर्मेनो के लिए सहानुभूति पैदा हो गई। जर्मेनो की पत्नी के निधन के बाद उन्हें अपने तीन बच्चों की देख रेख करनी पड़ रही है।
टिम बर्टेन के नेतृत्व में भारतीय मूल के निर्देशक शेखर कपूर समेत ज्यूरी के सदस्यों ने विजेता लोगों का चयन किया। पूर्व ‘बांड’ विलेन मैथ्यू अमालरिक को उनकी फिल्म ‘आन टूअर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया। इस फिल्म में एक ऐसे संयोजक की कहानी है जो कुछ फूहड़ हंसी मजाक करने वाले नर्तकों के साथ फ्रांस की यात्रा करता है।

Thursday, May 20, 2010

देश में उपेक्षित रवि का सम्मान हुआ परदेस में

हिंदी फिल्म संगीत का सुनहरा दौर एक अर्से पहले बीत चुका है, पर उसका जादू आज भी बरकरार है। पचास और साठ के दशक के गीत-संगीत ने जिस तरह लोगों के दिलों पर राज किया और दुनियाभर में इसकी धूम मची, उसकी मिसाल आज भी देखने-सुनने को मिल जाती है। ऎसी ही एक मिसाल पिछले दिनों पडोसी देश में देखने को मिली। हिंदी सिनेमा के गुणी और वरिष्ठ संगीतकार रवि को उनके 84वें जन्मदिन के उपलक्ष्य में श्रीलंका की सरकार और आम जनता ने जो इज्जत और सम्मान दिया है, वह बिरले ही लोगों को नसीब होता है। रवि श्रीलंका में सम्मानित होने वाली पहली भारतीय हस्ती हैं। हिंदी सिनेमा में उनके विशिष्ट योगदान के लिए इस राजकीय सम्मान का आयोजन राजधानी कोलंबो में श्रीलंका के संस्कृति मंत्रालय और ओल्ड हिंदी फिल्म सॉन्ग्स लवर्स सोसाइटी ने मिलकर किया था। श्रीलंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के साथ वहां के आम लोगों ने बडी तादाद में रवि के सम्मान में शिरकत की। वहां के जन समुदाय में रवि और उनका गीत-संगीत किस कदर लोकप्रिय है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके ज्यादातर गीतों को उन्हीं धुनों पर सिंहली भाषा में डब कर दिया गया है।
श्रीलंका में दस दिनों के प्रवास के दौरान रवि के मान-सम्मान में वहां की सरकार और जनता ने पलकें बिछा दी और किसी चेहेते राजा-महाराजा की तरह आदर-सत्कार दिया। सात मार्च को आयोजित किए गए विशेष सम्मान समारोह और अलग-अलग दिन आयोजित किए गए तमाम दूसरे कार्यक्रमों में श्रीलंका के कलाकारों ने रवि के संगीत से सजे गीतों को हिंदी भाषा और लगभग हर गीत में अपनी सिंहली भाषा में जिस तरह एक अंतरा जोडकर पेश किया, वह अद्भुत प्रयोग था। 'चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएं....', 'चौदहवीं का चांद हो....', 'बाबुल की दुआएं लेती जा...', 'ऎ मेरी जोहराजबीं...', 'वफा जिनसे की बेवफा हो गए...', 'नीले गगन के तले....' जैसे ढेर सारे यादगार गीतों को जिस खूबसूरती से पेश किया गया, वह लाजवाब था। हिंदी फिल्म संगीत को हिंदुस्तान ही नहीं, दुनियाभर में पॉपुलर बनाने में रेडियो सीलोन का सबसे ज्यादा योगदान रहा है। इस रेडियो चैनल के मौजूदा उद्घोष्ाक और स्टाफ ने भी रवि का स्वागत किया और उन्हें अपना स्टूडियो और विशिष्ट संगीत लाइब्रेरी का अवलोकन करवाया।
लता मंगेशकर, मुहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे, महेंद्र कपूर और आशा भोसले के गाए वे तमाम गीत आज भी जिस तरह से लोगों के दिलों में अपनी जगह बनाए हुए है, वह दरअसल उन गीतों की सुरीली धुनों का ही परिणाम है, जिन्हें रवि और उन जैसे महान संगीतकारों ने सजाया और संवारा है। वक्त चाहे कितनी भी करवटें ले ले, संगीत के कितने ही दौर आते-जाते रहे, पीढियां बदलती जाएं, पर हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम काल का गीत-संगीत हमेशा कालजयी रहेगा। रवि जैसे प्रतिभाशाली और गुणी संगीतकार का सिने संगीत में जो यादगार योगदान रहा है, हमारी सरकार को उसी के मुताबिक पद्मभूषण, पद्मविभूषण या फालके अवार्ड से उन्हें सम्मानित करने में देरी नहीं करनी चाहिए। दूसरे देशों में जब हमारे संगीत के सितारे इस कदर पूजे जाते हों, तब अपने ही देश में उन्हें यथोचित राष्ट्रीय अलंकरण से अलग रखना ठीक नहीं है(राजीव श्रीवास्तव,राजस्थान पत्रिका,17 अप्रैल,2010)

Wednesday, April 21, 2010

मनोज कुमार और गोवारिकर को पुरस्कार

तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस बार का राजकपूर लाइफ अचीवमेंट अवार्ड ,देशभक्ति की भावना पर आधारित फिल्मों के लिए भारत कुमार के नाम से मशहूर मनोज कुमार को देने का फैसला किया है।
मनोज कुमार का जन्म ब्रिटिश भारत में,उत्तर-पश्चिमी सीमांत प्रांत में अबोताबाद में 24 जुलाई,1937 को हुआ था। उनका मूल नाम हरिकिशन गिरि गोस्वामी है। उन्होंने दिल्ली के हिंदू कॉलेज से स्नातक की उपाधि ली है। फैशन(1957) उनकी पहली फिल्म थी । उन्हें पहली बार कांच की गुड़िया(1960) में लीड रोल मिला। शहीद(1965) से उनकी छवि देशभक्तिपूर्ण फिल्मों के नायक की हो गई। 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद,प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उनसे जय जवान जय किसान नारे पर फिल्म बनाने को कहा । उपकार इसी का नतीजा थी जिसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का फिल्मफेअर अवार्ड भी मिला था। उनकी आखिरी प्रमुख फिल्म क्लर्क(1989) थी। 2007 में,ओम शांति ओम में उन्हें जिस तरह से फिल्माया गया उसे भद्दा मजाक बताते हुए मनोज कुमार ने मुकदमा तक दायर करने की धमकी दी थी। वे होम्योपैथी के भी अच्छे जानकार बताए जाते हैं।
समारोह में,फिल्म लगान के निर्देशक आशुतोष गोवारिकर को राज कपूर स्पेशल कंट्रीब्यूशन अवार्ड दिया जाएगा। उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म पहला नशा (1993)थी मगर उन्हें जाना गया लगान,स्वदेश और जोधा-अकबर के निर्देशन के लिए। इन दिनों वे चिटगांव विद्रोह पर,अभिषेक और दीपिका को लेकर खेलें हम जी जान से बना रहे हैं।
मराठी फिल्म उद्योग में असाधारण योगदान के लिए वी. शांताराम अवार्ड आशा काले को दिया जा रहा है। अभिनेता और निर्माता सचिन पिलगांवकर को वी. शांताराम स्पेशल कंट्रीब्यूशन अवार्ड से नवाजा जाएगा।
यह अवार्ड हिंदी फिल्म उद्योग में उपलब्धियां हासिल करने वाले कलाकार को दिया जाता है।
विजेताओं को पुरस्कार स्वरूप दो लाख रुपये,स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री 27 अप्रैल को गेटवे ऑफ इंडिया परिसर में आयोजित समारोह में ये पुरस्कार प्रदान करेंगे।

Tuesday, April 20, 2010

काजोल को दीनानाथ पुरस्कार

काजोल को सिनेमा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मास्टर दीनानाथ विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें यह पुरस्कार षणमुखानंद सभागार में 24 अप्रैल को एक कार्यक्रम में पार्श्व गायिका लता मंगेशकर देंगी । इस पुरस्कार के तहत 50 हजार की नकद राशि और एक स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है । काजोल के अलावा गायक हरिहरन, पंडित शिवानंद पाटिल और प्रशांत दामले को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार प्रतिवर्ष 24 अप्रैल को लता मंगेशकर अपने पिता दीनानाथ मंगेशकर की पुण्यतिथि पर स्वयं प्रदान करती हैं।
काजोल की पिछली फिल्म "माई नेम इज खान" थी । पाठक जानते ही हैं कि काजल की फिल्मी पृष्ठभूमि रही है। उनकी माँ तनुजा और नानी शोभना समर्थ भी अभिनेत्री थीं। उनकी छोटी बहन तनिषा भी अब फिल्मों मैं काम कर रही हैं। उनके पिता का नाम शोमू मुखर्जी भी फिल्में बनाते थे। काजोल ने अपना फिल्मी सफ़र फिल्म बेख़ुदी से शुरू किया था। बाज़ीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे ने उन्हें स्टार हीरोईन बनाया। उन्होंने अजय देवगन से २४ फरवरी 1999को विवाह किया था। न्यसा उनकी बिटिया है ।

तीन भारतीय फिल्मों को रेमी अवार्ड


तीन भारतीय फिल्मों-"बोधिसत्व","एक ठो चांस" और "सलून" ने 43वें ह्यूस्टन अंतरराष्ट्रीय फिल्म एवं वीडियो फेस्टिवल में प्रतिष्ठित रेमी पुरस्कार जीते हैं। फीचर फिल्म श्रेणी का प्लेटिनम रेमी पुरस्कार बोधिसत्व को मिला। बोधिसत्व ने डेमी मूर-डेविड डुकोवनी की द जोंस और बेंजामिन बैरट की ला मिशन जैसी बड़ी फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह पुरस्कार जीता। महज सात दिनों में तैयार की गई यह फिल्म ह्यूस्टन के युवा फिल्म निर्माता सैन बनर्जी की है और इसकी शूटिंग कोलकाता में की गई थी। जाने-माने अभिनेता सौमित्र चटर्जी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में है। फिल्म में एक लड़की (त्रिशा राय) और उसके पिता (सौमित्र चटर्जी) के बीच मानसिक संघर्ष को दिखाया गया है। लड़की मानती है कि उसकी मां की आत्महत्या के लिए उसका पिता बोधिसत्व(सौमित्र चटर्जी) जिम्मेदार है।
सिल्वर रेमी पुरस्कार कामेडी / फीचर फिल्म श्रेणी में प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस की सलून को मिला। सत्य घटना पर आधारित इस फिल्म का निर्देशन किया है नवोदित निखिल नागेश भट्ट ने। यह फिल्म भारतीय मध्यवर्ग की कहानी बयां करती है जिसमें आम जनता भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों को सबक सिखाती है। इस फिल्म में मुख्य भूमिका गौरव कपूर,रज़क खान,साक्षी तंवर,बृजेन्द्र काला,मुरली शर्मा,गायत्री चौधरी और अरिंदम मित्रा की है।
एक ठो चांस भी प्रीतीश नंदी कम्युनिकेशंस की ही फिल्म है जिसमें अमृता अरोड़ा,रजत कपूर,सौरभ शुक्ला और विनय पाठक मुख्य भूमिका में हैं। इसे विदेशी फीचर फिल्म का विशेष जूरी अवार्ड दिया गया है। इसका निर्देशन सईद अख्तर मिर्ज़ा ने किया है। यह फिल्म इन दिनों सिंगापुर में चल रहे फिल्म फेस्टिवल में भी दिखाई जा रही है। यह फिल्म मुंबई में अपना भाग्य आजमाने प्रतिपल आ रहे लोगों की दास्तान बताती है। फिल्म बेहद साधारण तरीके से मनुष्य के स्वभाव को असाधारण बयां करती है।

Tuesday, April 13, 2010

"किंग सिरी" को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार

आईपीएल के कारण कई अच्छी फिल्में दर्शकों से महरूम रहीं। अन्य फिल्मी गतिविधियों की चर्चा भी कम ही हुई जिनमें से एक है लखनऊ में 7 अप्रैल से शुरू हुआ अंतर्राष्ट्रीय बाल फिल्मोत्सव। कल इस समारोह का अंतिम दिन था। इस फिल्मोत्सव में श्रीलंका की किंग सिरी को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला ।
सिटी मांटेसरी स्कूल द्वारा आयोजित इस फिल्मोत्सव में 38 देशों की 223 फिल्में दौड़ में थीं। कल इस समारोह के अंतिम दिन विभिन्न श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ रहीं फिल्मों को पुरस्कार दिए गए।
कानपुर रोड स्थित सीएमएस प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में भारत की लघु फिल्म विट्ठल को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म चुना गया। सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म के लिए श्रीलंका की फिल्म किंग सिरी के निर्देशक सोमरत्‍‌ने दिशानायके को दो लाख व निर्माता रेणुका बलसूर्या को एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया गया। सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म विट्ठल को एक लाख रुपये दिये गए। डेनमार्क की फिल्म स्ट्रोम को किंगसिरी के बाद दूसरे नम्बर पर रखा गया। सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का पुरस्कार फ्रांस की ले सिक्रेट डीएलोनोर को दिया गया। उसे एक लाख 25000 रुपये का पुरस्कार दिया गया। ईरान की फिल्म ए टाइम टू लव के बाल कलाकार मोहसेन तनबंदेह को एक लाख रुपये का जगदीश गांधी ज्यूरी एवार्ड मिला। पोलेंड की फिल्म द मैजिक ट्री को भारती गांधी आडियन्स पुरस्कार(एक लाख रुपये) मिला। ब्रिटेन की लघु एनीमेशन फिल्म लास्ट एंड फाउंड को सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिया गया। सभी श्रेणियों में 10 लाख रुपये के पुरस्कार दिए गए। समापन समारोह के मुख्य अतिथि निर्माता-निर्देशक अमोल पालेकर व उनकी पत्‍‌नी संध्या गोखले थीं।
महोत्सव में भारत के अलावा,अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, नीदरलैंड, कनाडा, आस्ट्रिया, साउथ कोरिया, आयरलैण्ड, लाटविया, सर्बिया, हालैण्ड, मारीशस, बुल्गारिया, लिथुआनिया, चीन, तैलिन, एस्टोनिया, ईरान आदि देशों की फिल्में प्रमुखता से दिखाई गईं। इनमें स्माइल पिंकी भी शामिल थी जो ऑस्कर के लिए नामित होते ही रातों-रात सुर्खी में आ गई थी।

Monday, April 12, 2010

देव आनंद को फाल्के रत्न

सदाबहार अभिनेता देव आनंद को दादा साहेब फाल्के अकादमी द्वारा इस वर्ष के फाल्के रत्न से सम्मानित किया जाएगा । उन्हें यह अवार्ड दादा साहेब फाल्के के जयंती के अवसर पर 30 अप्रैल को मुंबई में आयोजित एक समारोह में प्रदान किया जाएगा ।इस अकादमी से फिल्म उद्योग की 38 ऐसोसिएशन जुड़ी हैं।देव आनंद के पहले फाल्के अकादमी ने अबतक सुनील दत्त, दिलीप कुमार, बी आर चोपड़ा और मनोज कुमार को फाल्के रत्न से सम्मानित कर चुकी है ।

फाल्के अकादमी के प्रवक्ता जगदीश औरंगाबादकर के अनुसार देव आनंद को यह अवार्ड देने का निर्णय अकादमी के सदस्यों ने सर्वसम्मति से लिया । उम्र के ८७ वें मोड़ पर भी देव आनंद आज भी फिल्मों के निर्माण व निर्देशन के साथ ही अभिनय से जुड़े हुए हैं।

अभिनय के साथ ही निर्माण और निर्देशन में पिछले 60 सालों से बॉलीवुड में सक्रिय देव आनंद ने हम सब एक हैं से अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत की थी इसके बाद मुनिमजी, सीआईडी, काला पानी, हम दोनों, ज्वैल थीफ, गाइड, जॉनी मेरा नाम, तेरे मेरे सपने, हरे रामा हरे कृष्णा जैसी कई महत्वपूर्ण फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेरा । इन दिनों वह अपनी आनेवाली फिल्म चार्जशीट के निर्माण व निर्देशन में जुटे हैं । देव आनंद ने अबतक के अपने फिल्मी कैरियर में एक दर्जन से अधिक नयी हीरोइनों को बॉलीवुड में चांस दिया है जिनमें जाहिदा, जीनत अमान से लेकर टीना मुनिम तक का शुमार है ।
(इंद्रधनुष,नई दुनिया,दिल्ली,10.4.2010 से साभार)

Monday, March 29, 2010

प्रतिभा सिंह को भिखारी ठाकुर सम्मान मिला

भोजपुरी की विख्यात गायिका और अभिनेत्री प्रतिभा सिंह को भिखारी ठाकुर सम्मान-2010 प्रदान किया गया। 27 मार्च की देश शाम प्रारम्भ हुए इस समारोह में आरा की जदयू सांसद मीना सिंह ने उन्हें यह सम्मान राशि, मानपत्र, स्मृति-फलक एवं शाल प्रदान किया। यह सम्मान सामाजिक शोध संस्थान, भोजपुर, आरा द्वारा एक भव्य लोक-संगीत समारोह में प्रदान किया गया । इस अवसर पर मीना सिंह ने कहा कि प्रतिभा सिंह ने अपने गायन से भोजपुरी के लोकरंग को बचाये रखा है। वे लोकप्रियता पाने के लिए अश्लीलता की बैसाखियों का सहारा नहीं लेतीं। वे हमारी पुरातन लोक धुनों को भी बखूबी गाती हैं और आधुनिक गीतों से भी आज के युवाओं की रुचि को संस्कारित कर रही हैं। लोक और आधुनिकता को संगम उनके यहां मिलेगा। वे फिल्मों में भी काम कर रही हैं और उसमें वे कामयाब हों, हमारी यह शुभकामना है।
उन्होंने कहा कि भोजपुरी लोक-कला और संस्कृति को संरक्षण देने में लगे भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान का प्रयास सराहनीय है। कलाकारों, पत्रकारों और साहित्यकारों के सहयोग से यह संस्थान बिना किसी सरकारी सहायता के वर्ष 2002 से वर्ष में चार कार्यक्रम करता आ रहा है।
प्रतिभा सिंह पिछले एक दशक से भोजपुरी गायकी में अपने गायन से अपना विशिष्ट स्थान बना पाने में कामयाब रही हैं। उनके एक दर्जन से अधिक कैसेट व सीडी जारी हुए हैं। देश भर में सैकड़ों स्टेज शो करने वाली प्रतिभा को इसके पहले आकांक्षा संस्कृति सम्मान मिला है। पोलिया से बचाव के अभियान के यूनिसेफ और पश्चिम बंगाल सरकार साझा जागरुकता अभियान में उनके गीतों का कैसेट भोजपुरी में जारी हुआ था जो अब भी हिन्दी उर्दू भाषी बहुल क्षेत्रों में पोलियो बूथों पर बजाया जाता है। इधर रेडियो पर मलेरिया से सावधान करने वाले जिंगल में भी उनकी आवाज सुनायी देती है।
इस अवसर पर प्रतिभा सिंह ने कहा कि भोजपुरी संगीत बेजोड़ है। हमारे पास हर संस्कार के गीत हैं जो यह बताता है कि हम कितने संगीतमय हैं। हमें विलुप्त होते अपने संस्कार गीतों को बचाना है और उसके लिए जरूरी है कि लोक कलाकारों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाये कि वे अपने जीवन में संगीत को बचाये रखें। हमें अपने लोकसंगीत की शक्ति को पहचानना होगा वरना वह आधुनिकता की अंधी दौड़ में कहीं खो जायेगा या फिर अपनी मौलिकता खो देगा। इस अवसर पर उन्होंने अपने कुछ गीत भी सुनाये। उसके बाद रात भर चले चैता के कार्यक्रम में आसपास के गावों से आये लोक-कलाकारों को सात गोल ने अपने कार्यक्रम प्रस्तुत किये जिनमें रामाज्ञा राम विशेष तौर पर शामिल थे जो बिहारी ठाकुर की मंडली में थे।
(भोजपुरीमेधा डॉट ब्लॉगस्पॉट से साभार)

Saturday, March 27, 2010

प्रतिभा सिंह के भिखारी ठाकुर सम्मान

भोजपुरी के चर्चित गायिका अउर अभिनेत्री प्रतिभा सिंह के आज एह वर्ष के भिखारी ठाकुर सम्मान दीहल जा रहल बा। ई पुरस्कार भिखारी ठाकुर सामाजिक शोध संस्थान, भोजपुर, आरा द्वारा दीहल जाला। पुरस्कार आज आरा में आयोजित एक रंगारंग संगीत समारोह में दीहल जाइ।
प्रतिभा सिंह पिछला एक दशक से भोजपुरी गायिकी में आपन विशिष्ट स्थान बनवले बाड़ी। उनुकर एक दर्जन से ज्यादा कैसेट अउर सीडी रिलीज हो चुकल बा जवन के एचएमवी-सारेगामा, प्राइम, न्यू विक्टोरिया अउर स्काइ जइसन प्रतिष्ठित म्यूजिक कंपनी द्वारा रिलीज कईल गइल ह। उनकर 'पनवा खिला दे सैंया', 'पिया नम्बर वन' अउर 'छैला रंगदार चाहीं' एलबम धूम मचा देले रहे। हाले से प्रतिभा जी एक्टिंग भी शुरू कइले बाड़ी। रउआ 'भाई होखे त भरत नियन' फिल्म में उनका के देख चुकल बानी। 'आई हो दादा', 'बहिना तोहरे खातिर' अउर 'माटी मांगे खून' में भी उनकर एक्टिंग आ गीत देखे-सुने के मिली।
प्रतिभाजी बलिया जिला के रोहुआं-तिवारी गांव के बाड़ी सन। रउआ बाकायदा शास्त्रीय संगीत में शिक्षित बानी। प्रयाग संगीत समिति,इलाहाबाद से शास्त्रीय संगीत गायन में संगीत प्रभाकर (छह वर्षीय पाठ्यक्रम) कइले बाड़ी। शास्त्रीय संगीत के विधिवत तालीम रउआ विख्यात तबलावादक पं.ज्ञान प्रकाश घोष के शिष्य पं.स्व.सुधीर चौधरी से प्राप्त कइनी। देश भर में सैकड़ों स्टेज शो कर चुकल बानी आ उनका के एह से पहिले आकांक्षा संस्कृति सम्मान मिल चुकल बा। उनकर कार्यक्रम अउर इंटरव्यू रउआ ईटीवी, महुआ, ताजा़ टीवी, अहिंसा, दूरदर्शन आदि पर भी देखले होखब। पश्चिम बंगाल सरकार पहिली बेर प्रचार खातिर भोजपुरी के सहारा लेले बा। यूनिसेफ के साझा तत्वावधान में पोलियो के प्रति जागरुकता अभियान के तहत प्रतिभा जी के गावल गीत के कैसेट बनावल गइल ह जे हिन्दी भाषी क्षेत्र में पोलियो बूथ पर बजावल जाला। प्रतिभा जी स्थायी रूप से कोलकाता में रहेली।

Thursday, March 25, 2010

अर्चना पूरण सिंह को टेपा सम्मान

1 अप्रैल को,अंतर्राष्ट्रीय मूर्ख दिवस पर,40 वें अखिल भारतीय टेपा सम्मेलन में फिल्म अभिनेत्री व टीवी कलाकार अर्चना पूरन सिंह को हास्य-व्यंग्य का राधा लाला अमरनाथ स्मृति टेपा सम्मान प्रदान किया जाएगा।उन्हें यह सम्मान उज्जैन में कालिदास अकादमी में रात ८ बजे होने वाले सम्मेलन में  प्रदान किया जाएगा। वे कार्यक्रम में प्रस्तुति भी देंगी।  अर्चना ने अग्निपथ, सौदागर, मोहब्बतें, क्रिश, कुछ-कुछ होता है, दे दनादन, कल किसने देखा, लव स्टोरी २०५० आदि फिल्मों के साथ टीवी शो कॉमेडी सर्कस में निर्णायक की भूमिका अदा की है। उन्हें कुछ-कुछ होता है के लिए १९९९ में बेस्ट कॉमेडियन का स्टार स्क्रीन अवार्ड भी मिला है। उनसे पूर्व शेखर सुमन, गुलशन ग्रोवर, राजेश पुरी, हिमानी शिवपुरी, प्रेम चौपड़ा, असरानी को टेपा सम्मान दिया जा चुका है।

Friday, March 19, 2010

आज दादा साहब फाल्के पुरस्कार का सीधा प्रसारण

पिछले दिनों राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई थी। ये पुरस्कार आज दिए जा रहे हैं जिसका आज दूरदर्शन पर शाम साढे पांच बजे से सीधा प्रसारण किया जाएगा। पाठकों को ध्यान होगा कि इस बार दादा साहब फाल्के अवार्ड मशहूर छायाकार वी.के.मूर्ति को दिया जा रहा है। आज दैनिक जागरण ने मूर्ति जी के संबंध मे अमिताभ की प्रतिक्रिया छापी है। आप भी पढिएः

आज के दौर की फिल्मों में भी अपना लोहा मनवा रहे सदी के महानायक अमिताभ बच्चन खुद पुरानी फिल्मों को दिवाने हैं। अमिताभ का कहना है कि पुरानी फिल्मों के कुछ दृश्यों को भुला पाना असंभव है। इन यादगार पलों को उस समय कैमरे में कैद करने में कभी- कभी पूरा दिन लग जाता था, लेकिन वीके मूर्ति जैसे तकनीशियन इस काम को पूरे समर्पण के साथ अंजाम देते थे। आज के दौर में काम के प्रति ऐसे समर्पण का अभाव है। बिग बी ने ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि गुरुदत्त की फिल्म कागज के फूल का वह दृश्य भला कौन भूल सकता है जब वहीदा रहमान गाती हैं वक्त ने किया । प्यासा फिल्म का एक यादगार दृश्य है जब थिएटर में ये दुनिया अगर मिल भी जाए गा रहे गुरुदत्त को बालकनी से वहीदा देखती हैं और क्लोजअप में उनकी पीड़ा नजर आती है। साहब बीवी और गुलाम में मीना कुमारी रात को घर से जा रहे पति रहमान को रोकने के लिए ना जाओ सैंयां गाती हैं। इन यादगार दृश्यों को कैमरे में मूर्ति ने कैद किया था। मूर्ति को इस साल फिल्म जगत का सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया है। मूर्ति की और उनके काम की सराहना करते हुए अमिताभ ने लिखा है कि कुछ साल पहले आईआईएफए अवार्ड समारोह में मैं पिछली सीट पर मूर्ति के पास बैठा था। जैसे ही पुरस्कार के लिए उनके नाम की घोषणा की गई, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। मैंने उन्हें बधाई दी। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा था कि एक तकनीशियन को सम्मानित किया जा रहा है। अमिताभ के अनुसार, उन्होंने दो फिल्में नास्तिक और राम बलराम मूर्ति के साथ की हैं, लेकिन उनका सर्वाधिक महत्वपूर्ण काम एक अन्य महान फिल्मकार गुरुदत्त की फिल्मों का छायांकन है।

Monday, March 15, 2010

अमिताभ को लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार

अमिताभ बच्चन को हांगकांग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में लाइफ टाइम एचिवमेंट अवार्ड दिया जाएगा । उन्हें यह सम्मान एशियन फिल्म अवार्ड समारोह के दौरान दिया जाएगा । अमिताभ बच्चन स्वयं यह सम्मान २२ मार्च को ग्रहण करेंगे । अमिताभ बच्चन हिंदी सिनेमा में अपने चार दशक के कॅरिअर में सौ से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं । उनकी हालिया रिलीज फिल्में "द लास्ट लीयर", "सरकार राज" और "पा" बेहद चर्चित हुई है । उन्होंने विश्व सिनेमा पर अपनी अलग छाप छोड़ी है ।