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Friday, November 26, 2010

क्षेत्रीय फ़िल्म निर्माताओं को लुभाएगा गोवा

बॉलीवुड निर्देशकों को लुभाने के बाद गोवा अब क्षेत्रीय फिल्म निर्माताओं को अपनी ओर रिझाने के लिए भी तैयार हैं। एंटरटेनमेंट सोसाइटी ऑफ गोवाज (ईएसजी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि क्षेत्रीय फिल्म निर्माता आम तौर पर अपने प्रदेश के क्षेत्रों को ही प्राथमिकता देते हैं और गोवा की तरफ नहीं देखते। उन्होंने कहा कि कई मराठी फिल्मों की शूटिंग गोवा में हुई है, पर प्रदेश कभी भी दक्षिण की फिल्मों में नहीं दिखाई दिया। श्रीवास्तव ने कहा, हमें गोवा के बाहर के फिल्म निर्माताओं तक अपनी आर्थिक योजनाएं पहुंचानी होंगी और हम ऐसा कर रहे हैं। प्रदेश में पिछले दिनों गुजारिश, खेलें हम जी जान से, गोलमाल 3 और प्लेयर्स की शूटिंग हुई है। पिछले कुछ सालों के दौरान गौवा फिल्मों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण स्थल बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि कई विदेशी फिल्मों की शूटिंग भी गोवा में हो चुकी है। इससे अलग, कम से कम 40 से 50 बड़ी फिल्मों और वृत्तचित्रों को यहां शूट किया जा चुका है। श्रीवास्तव ने जोड़ा कि बर्फबारी को छोड़ दिया जाए तो यहां सब कुछ मौजूद है, यहां तक कि आप यहां कृत्रिम रेगिस्तान का भी आसानी से सेट बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि कलात्मक निर्माण के नजरिए से देखें तो यहां कई किले, पुर्तगालियों के समय के घर, बंगले, नदियों के पुल, मल्टिप्लेक्स, स्टेडियम, लाइट हाउस सब कुछ है। एक दिवसीय सेमीनार के दौरान सर्विस एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के महानिदेशक राजेश शर्मा, नोमाद फिल्म्स के जुनैद मेनन, केएएस मूवी मेकर्स के कल्याण मुखर्जी ने भी अपनी प्रेजेंटेशन प्रस्तुत कीं। मुखर्जी ने कहा कि स्वीकृति के बिना गिरिजाघरों जैसी जगहों पर शूटिंग करना बेहद कठिन होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ ईएसजी ही ऐसी जगहों के लिए समझौते करता है मगर अंदर की शूटिंग करने के फिल्म निर्माताओं को बेहद परेशानी का सामना करना पड़ता है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,25.11.2010 में पणजी से रिपोर्ट)।

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