स्वागत
Showing posts with label ज़रा हट के. Show all posts
Showing posts with label ज़रा हट के. Show all posts

Wednesday, June 1, 2011

वर्षों से मृत माने जा रहे अभिनेता राज किरण अटलांटा में मिले

फिल्म अभिनेत्री दीप्ति नवल ने पिछले महीने फेसबुक के जरिए अपने सह अभिनेता रहे मशहूर कलाकार राज किरण को खोजने की जो मुहिम शुरू की थी उसे अंजाम तक पहुंचाया है अभिनेता ऋषि कपूर ने। राज जीवित हैं और अमेरिका के अटलांटा में अपना इलाज करा रहे हैं। निर्माता-निर्देशक सुभाष घई की मशहूर फिल्म कर्ज में ऋषि कपूर ने राज किरन के पुनर्जन्म का किरदार निभाया था। राज किरण को हिंदी फिल्म जगत के ज्यादातर लोग मृत मान चुके थे और उनके सही सलामत होने की खबर पर फिल्म उद्योग ने खुशी जताई है।

सत्तर के दशक में कई हिट फिल्मों में काम करने वाले राज किरण के बारे में लोगों को हाल के दिनों तक कुछ पता नहीं था। कुछ अरसा पहले खबर ये भी आई थी कि राज किरण की मौत हो चुकी है। उनकी दिमागी हालत बिगड़ने का पहला किस्सा उनके स्टारडम के दिनों में ही तब सामने आया था, जब पुट्टपर्थी में सत्य साईं बाबा के आश्रम में उन्हें हिरासत में लिया गया था। वह तब बार-बार सत्य साईं के खिलाफ बातें किया करते थे और उन पर साईंबाबा की हत्या की कोशिश करने का आरोप भी लगा। राज किरण ने इसके बाद मुंबई के भायखला स्थित पागलखाने में लंबा वक्त गुजारा।

भायखला पागलखाने में ही हिंदी सिनेमा में उनके चंद शुभचिंतकों ने उनसे आखिरी मुलाकात की थी। बाद में हालत सुधरने के बाद राज किरण अमेरिका चले गए और वहां कुछ लोगों ने उन्हें न्यूयॉर्क में टैक्सी चलाते भी देखा। वहां से भी मे एक दिन एकाएक लापता हो गए। अभिनेता ऋषि कपूर भी दीप्ति नवल की तरह अरसे से राज किरण की तलाश में थे और हाल ही में अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने राज किरण के भाई गोविंद मेहतानी का पता तलाश कर उनसे मुलाकात की।

गोविंद ने ऋषि कपूर को बताया कि राज किरण जीवित हैं और अटलांटा के एक संस्थान में अपना मानसिक इलाज करा रहे हैं। राज किरण अपने इलाज के लिए आवश्यक रकम जुटाने के लिए इस संस्थान में ही काम भी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक राज किरण की पत्नी और बेटे ने उन्हें उनके हाल पर बरसों पहले छोड़ दिया था और अपने भाइयों से मदद की आस में ही वह अमेरिका चले गए थे, लेकिन वहां भी उनका साथ किसी ने नहीं दिया।

ऩईदुनिया से बात करते हुए ऋषि कपूर ने कहा कि राज किरण को वह कभी भूल नहीं सकते और उनके बारे में मिली इस जानकारी ने उन्हें काफी परेशान भी किया है। वह राज के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हैं और ये भी चाहते हैं कि वह वापस हिंदी फिल्म जगत में लौटें। फिल्म निर्माता सुभाष घई के मुताबिक राज किरण की ये हालत शायद उन्हें अपेक्षित सफलता न मिल पाने की वजह से हुई। वह कहते हैं कि ग्लैमर जगत के इस पहलू को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है। राज की हालत के बारे में दुख जताते हुए घई ने उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की है(नई दुनिया,दिल्ली,1.6.11)।

दैनिक जागरण की रिपोर्टः
बॉलीवुड में 70 और 80 के दशक के मशहूर अभिनेता राज किरण इन दिनों अमेरिका के एक पागलखाने में हैं। यह पता लगाया है उनके करीबी दोस्त ऋषि कपूर ने। राज किरण ने ऋषि की सुभाष घई निर्देशित सुपरहिट फिल्म कर्ज में उनके पूर्व जन्म के किरदार को निभाया था। महेश भट्ट की फिल्म अर्थ में शबाना आजमी और उन पर फिल्माया गया गाना, तुम इतना जो मुस्करा रहे हो.. आज भी लोग गुनगुनाते हैं। वह पिछले एक दशक से गायब हैं। ऋषि कपूर और दीप्ति नवल जैसे उनके मित्रों को छोड़कर प्राय: सभी उन्हें मृत मान लिया था। दीप्ति नवल ने पिछले दिनों फेसबुक पर भी राज किरण को खोजने के लिए एक पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा, खबर थी कि राज को न्यूयॉर्क में कैब चलाते हुए आखिरी बार देखा गया था। उसके बाद ऋषि कपूर ने अपने दोस्त को खोजने की ठान ली। एक फिल्म की शूटिंग के लिए अमेरिका गए ऋषि कपूर ने वहां राज किरण के भाई गोविंद मेहतानी से मुलाकात की। उन्होंने पूछा कि राज अचानक कहां गायब हो गए? मेहतानी ने ऋषि को बताया कि राज किरण की दिमागी हालत ठीक न होने की वजह से वह अटलांटा के मेंटल हॉस्पिटल में हैं। बताया जाता है कि राज की पत्‍‌नी और बेटा उन्हें छोड़कर चले गए और वह इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर पाए। पारिवारिक जीवन में आए दूसरे संकटों की वजह से भी राज अवसाद से घिर गए। परिवार के बाकी सदस्यों ने भी राज की देखभाल नहीं की, शायद इसकी वजह उनका इलाज महंगा था। ऋषि ने कहा, यह काफी हृदय विदारक है। लेकिन मुझे इस बात की खुशी है कि वह जिंदा हैं। उनके जीवित होने की खबरों के बीच फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें वापस लाने की बातें कही जा रही हैं। निर्देशक सुभाष घई और महेश भट्ट ने कहा कि वह राज किरण को वापस लाने की कोशिश का हिस्सा बनने में खुशी महसूस करेंगे। दो दशक तक इस अभिनेता ने कागज की नाव, घर हो तो ऐसा, घर एक मंदिर, कर्ज, वारिस और अर्थ जैसी कई लोकप्रिय फिल्मों में काम किया है।

Friday, April 15, 2011

फर्स्ट डे फर्स्ट शो अब आपके घर पर

तकनीक का चमत्कार यूं ही जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब अपने पसंदीदा सितारे की ताजातरीन फिल्म देखने के लिए फिल्म की रिलीज के दिन आप अपने घर के भीतर बाहर से ताला लगाकर बैठें। क्योंकि, आप नहीं चाहेंगे कि आपकी ये पसंदीदा फिल्म बजाय सिनेमाघर के जब आप अपने घर में अपने खास दोस्तों के साथ देख रहे हों तो कोई आपको डिस्टर्ब करे। उपग्रहों से सीधे आपके टेलीविजन के लिए तमाम चैनल पकड़ने वाले छोटी सी छतरी का दिमाग बड़ा हो रहा है और इसके जरिए आपकी जेब से पैसा निकालने की एक चुपचाप लेकिन चौंकाने वाली कोशिश शुरू हो गई है।

देश में फिल्मों को थिएटरों तक पहुंचाने के तरीकों में पिछले तीन-चार साल में क्रांतिकारी परिवर्तन हो चुका है। अब तमाम सिनेमाघरों के मालिक वितरकों के पास फिल्म के प्रिंट लेने के ना तो अपने कर्मचारी भेजते हैं और ना ही शुक्रवार की दोपहर तक ट्रेन लेट होने या रास्ते में ट्रैफिक जाम लग जाने के चलते प्रिंट न आने पर उनकी सांसें ही फूलती हैं। कभी जी समूह के लिए देश में पहली ऑन लाइन लॉटरी प्लेविन की परिकल्पना सोचने और उसे अमली जामा पहनाने वाले और पेशे से इंजीनियर संजय गायकवाड़ ने छह साल पहले एक ऐसी तकनीक की परिकल्पना की जिसके जरिए फिल्मों का सिनेमाघरों में प्रदर्शन और वितरण एक जगह से नियंत्रित किया जा सके। पूरे देश में करीब ढाई हजार सिनेमाघर अब इसी तकनीक से सैटेलाइज के जरिए फिल्में दिखाते हैं।

सैटेलाइट के जरिए एमपीईजी ४ स्तर का डिजिटल प्रसारण मुहैया कराने वाली दुनिया की इकलौती कंपनी यूएफओ मूवीज को चलाने वाले वैल्यूएबल ग्रुप के भीतर अब एक और क्रांतिकारी काम चल रहा है। ये कदम है देश में सिनेमा के शौकीनों का एक ऐसा क्लब तैयार करने का, जो नई फिल्में देखने के लिए ५० हजार से लेकर एक लाख रुपए प्रति फिल्म तक खर्च करने का माद्दा रखते हों। ये कीमत सदस्यों की संख्या बढ़ने पर आगे कम भी हो सकती है। क्लब एक्स नाम के इस समूह में अब तक हर्ष गोयनका, अमित बर्मन और छगन भुजबल के अलावा शाहरूख खान,अजय देवगन और सचिन तेंदुलकर शामिल हो चुके हैं। क्लब की सदस्यता फिलहाल केवल आमंत्रण से है और जाहिर है,इसका सदस्य बनने से पहले आपकी कोठी में दस-बारह लोगों के एक साथ बैठने लायक छोटा सा थिएटर भी होना चाहिए(पंकज शुक्ल,नई दुनिया,दिल्ली,15.4.11)

Thursday, January 27, 2011

हीरोईनें और सेक्स रैकेट

दक्षिण भारतीय हिरोइन यमुना आजकल कई गलत वजह से चर्चा में है। सेक्‍स रैकेट चलाने के आरोप में यमुना की रंगे हाथ गिरफ्तारी के बाद बेंगलुरू पुलिस की नजर अब केरल पर है। पुलिस अधिकारियों को इस बात की पुख्‍ता जानकारी मिली है कि बेंगलुरू के पांच सितारा होटल से पकड़े गए आरोपियों का नेटवर्क पूरे देश में है। ऐसे में पुलिस अपनी जांच का दायरा केरल तक बढ़ाने की तैयारी कर रही है ताकि दक्षिण भारत के कई राज्‍यों में चल रहे सेक्‍स रैकेट का भंडाफोड़ किया जा सके।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस सेक्स रैकट का जाल पूरे देश में फैला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक इंटरनेट पर लेनदेन की गई है। इसी के जरिए पुलिस केरल सहित कई जगहों पर नजर रखी हुई है। पुलिस इस बात की जांच में जुटी हुई है कि कहीं लेनदेन करने वाले सेक्स रैकेट के सदस्य ही तो नहीं हैं।

बेंगलुरू पुलिस दक्षिण भारत की फिल्‍म और मॉडलिंग इंडस्‍ट्री से जुड़े कई लोगों पर नजर रखे हुए है। बेंगलुरू के ज्‍वाइंट पुलिस कमिश्‍नर (क्राइम) आलोक कुमार ने बताया कि पुलिस ने सेक्‍स रैकेट के इस देशव्‍यापी जाल को तोड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

यमुना पिछले हफ्ते गिरफ्तार तो हो गई थी लेकिन जल्‍द ही जमानत पर रिहा भी हो गई थी। हालांकि वह इस घटना के बाद से दिखी नहीं है। पिछले हफ्ते शहर के मशहूर होटल से यमुना के साथ एक उसके एजेंट सुरक्षित सुमन और एक आईटी कंपनी के सीईओ वेणुगोपाल को बेंगलुरु पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना है कि शहर के तमाम बड़े होटलों में बड़ी-बड़ी पार्टियों के बहाने सेक्स रैकेट चलता था।

दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग यह जानकर हैरान है कि इतनी स्वच्छ छवि को बरकरार रखते हुए वह सेक्स रैकेट जैसे गंदे धंधे में शामिल थी। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इस तरह कई अभिनेत्रियां है जो यमुना के जैसी जिन्दगी जी रही हैं। बेंगलुरू पुलिस के पास उन सबकी जानकारी है लेकिन पुलिस उन सबको रंगे हाथों गिरफ्तार करना चाहती है।

बॉलीवुड हो या टॉलीवुड, इसके दामन पर सेक्‍स रैकेट के दाग तो लग ही गए हैं। आए दिन ऐसे सेक्‍स रैकेट के खुलासे किस ओर इशारा कर रहे हैं? समाज का यह कैसा चेहरा हमारे सामने आ रहा है? क्‍या यह मौजूदा समाज के चकाचौंध का नतीजा है?(दैनिक भास्कर,दिल्ली,27.1.11)

Tuesday, December 28, 2010

अदनान की लिफ्ट ग्राउंड पर,आठ फ्लैट जब्त

बालीवुड फिल्मों में अपनी गायकी का लोहा मनवाने वाले पाकिस्तानी गायक अदनान सामी पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गाज गिर गई है। ईडी ने सामी के आठ फ्लैट और कार पार्किंग के लिए नियत पांच स्थानों को अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा निदेशालय ने एक बहुमंजिला इमारत में भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति लिए बिना इन फ्लैटों की खरीद के लिए सामी पर 20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। निदेशालय के सूत्रों ने बताया कि उपनगरीय अंधेरी के आलीशान लोखंडवाला परिसर में ओबेराय स्काई गार्डन हाऊसिंग सोसाइटी में इन आठ फ्लैटों को अदनान ने 2003 में 2.53 करोड़ रुपये में खरीदा था। यह विदेशी विनिमय प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति की खरीद और हस्तांतरण) अधिनियम यानी फेमा का सीधा-सीधा उल्लंघन है क्योंकि वह पाकिस्तानी नागरिक हैं। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, कोई भी ऐसा व्यक्ति जो पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, नेपाल या भूटान का नागरिक है। वह रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना भारत में अचल संपत्ति की न तो खरीद कर सकता है और न ही उसका किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरण कर सकता है। ईडी ने फेमा न्यायिक प्राधिकरण के एक आदेश के बाद इन संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया। अदनान ने 2008 में इनमें से पांच फ्लैट और तीन पार्किंग स्थलों को अपनी पत्नी सबा गलादरी को उपहार में दे दिया था। सबा संयुक्त अरब अमीरात की नागरिक है। गायक की ये सारी हरकतें फेमा के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन था। लिहाजा ईडी ने यह कार्रवाई की। सबसे पहले नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न फ्लैट और पार्किंग स्थलों को जब्त कर लिया जाएगा। इस वर्ष के शुरू में उन्हें पूछताछ के लिए भी प्रवर्तन निदेशालय मुख्यालय बुलाया गया था। ईडी का कहना है कि अदनान ने संपत्तियों को खरीदने के लिए रिजर्व बैंक से अनुमति नहीं ली थी। अचल संपत्तियों पर कब्जा लेने के बाद जब अदनान सामी ने अनुमति मांगी तो रिजर्व बैंक ने उनकी अर्जी को ठुकरा दिया। रिजर्व की ओर से कहा गया कि अचल संपत्तियों को खरीदने के लिए लोन हासिल करते वक्त अदनान ने कर्ज देने वाले बैंक से यह कह कर गुमराह किया कि वह भारत का नागरिक है। इसके बाद मामला फेमा न्यायिक प्राधिकरण पहुंचा। प्राधिकरण में सामी ने कहा कि उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया है। दस वर्षो से आयकर भी चुका रहे हैं। उनकी मां जम्मू से थीं और भारत में उनकी जड़े हैं। जब्ती कार्रवाई पर उनके वकील विभव कृष्ण ने कहा कि इसके खिलाफ दो दिन में अपील दायर करेंगे(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,28.12.2010)।

Monday, December 27, 2010

कॉपीराइट कानून में संशोधनों के खिलाफ एकजुट हुए निर्माता

दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाले देश के सारे फिल्म निर्माता ६ जनवरी को देशव्यापी हड़ताल करने जा रहे हैं। ये हड़ताल केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा कॉपी राइट कानून में प्रस्तावित संशोधनों के विरोध में की जा रही है। फिल्म निर्माताओं का कहना है केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल अपने कुछ दोस्तों के बहकावे में आ चुके हैं और फिल्म जगत की वस्तुस्थिति जानने के लिए उनका मंत्रालय कोई कोशिश नहीं कर रहा।

कॉपीराइट कानून में प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक अब लेखकों और गीतकारों को फिल्म की रॉयल्टी में हिस्सा मिलेगा और किसी भी तरह के अनुबंध के द्वारा इस हक़ को खत्म नहीं किया जा सकेगा। फिल्म उद्योग में अभी तक ऐसी शर्त गायिका लता मंगेशकर और संगीतकार ए आर रहमान जैसे लोग ही अपवाद स्वरूप फिल्म साइन करते समय रखते रहे हैं, लेकिन कानून में संशोधन के बाद यह हक हर लेखक और गीतकार को मिल जाएगा। फिल्म निर्माता इसे फिल्म उद्योग के खिलाफ एक बड़ी साजिश बता रहे हैं और उनका कहना है कि लेखक या गीतकार सिर्फ लेखन का काम करता है, उसके बाद तमाम सारे तकनीशियन मिलकर उसे जीवंत करने की कोशिश करते हैं, ऐसे में रायल्टी पर आने वाले दिनों में कपड़े बनाने वालों से लेकर सेट बनाने वाले और सिनेमैटोग्राफर तक सभी रॉयल्टी मांगना शुरू कर देंगे क्योंकि कोई कहानी या गीत लिख देने भर से ही न तो फिल्म बन जाती है और न ही वो गाना परदे पर जीवंत हो सकता है।

इस बीच फिल्म निर्देशकों की संस्था ने भी लेखकों और गीतकारों की देखादेखी रॉयल्टी में हिस्सा मांगने की मुहिम शुरू कर रखी है। दो दिन पहले हिंदी फिल्में और धारावाहिक बनाने वाले निर्देशकों की इस बारे में मुंबई में बैठक भी हुई।

मामला संगीन होते देख फिल्म निर्माताओं की मातृ संस्था फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने अब ये मामला अपने हाथ में ले लिया है। उधर, कॉपी राइट कानून में संशोधनों के लिए सबसे ज्यादा कोशिश करते रहे सांसद और गीतकार जावेद अख्तर का उनकी इन कथित फिल्मी उद्योग विरोधी कोशिशों के जलते फिल्म फेडरेशन ने अनिश्चितकालीन बहिष्कार कर दिया है(पंकज शुक्ल,नई दुनिया,दिल्ली,27.12.2010)।

Sunday, December 12, 2010

आमिर का भाव उछाल पर, शाहरुख की चमक फीकी

सियासत के बॉक्स ऑफिस पर रणछो़ड़दास श्यामलाल चांच़ड़ की बल्ले-बल्ले है। सिल्वर स्क्रीन के रैंचो के जलवे के आगे किंग खान की चमक फीकी प़ड़ गई है। सियासत के सेंसेक्स पर रैंचो का भाव उछाल मार रहा है और वह राजनीतिक गलियारे के मोस्ट वांटेड बन गए हैं। रैंचो को पहचाना नहीं? जी हां, हम थ्री इडियट्स के रैंचो की ही बात कर रहे हैं यानी फिल्म अभिनेता आमिर खान की।

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों फिल्म अभिनेता आमिर खान की अदाकारी और उनके सामाजिक सरोकारों की खूब चर्चा है। तो शाहरुख खान लगभग राजनीतिक परिदृश्य से नदारद दिखाई दे रहे हैं। कुछ समय पहले तक राजनीतिक गलियारों में शाहरुख की खूब पूछ हुआ करती थी। पर अपने सामाजिक सरोकारों और उससे जु़ड़ी फिल्मों जैसे रंग दे बंसती, तारे जमीं पर, थ्री इडियट्स और पीपली लाइव जैसी फिल्में बनाकर आमिर ने अब उनकी जगह ले ली है। कांग्रेस हो या भाजपा, शाहरुख ने भविष्य की संभावनाओं को तलाशते हुए दोनों दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश की थी। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके नजदीकी रिश्ते रहे। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं पर बनाए गए वीडियो में भी कुछ कविताएं गाईं। राजनीति के जानकारों के मुताबिक कुछ इसी तर्ज पर आमिर खान भी कांग्रेस और भाजपा में समान तौर पर पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। एक राष्ट्रीय पार्टी के प्रमुख नेता का कहना है कि जिस तरह आमिर कांग्रेस और भाजपा दोनों के बीच तालमेल बैठा कर चल रहे हैं इससे वह न केवल अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि पेश कर रहे हैं बल्कि कुछ समय बाद उनके राजनीति में आने की संभावना को भी नहीं नकारा जा सकता। आमिर एक तरफ फिल्म इंड्रस्ट्री में ऐसे सिनेमा के पैरोकार दिखाई देते हैं जिससे समाज को एक संदेश मिल सके और दूसरी तरफ सरकार को अपने स्टारडम की कुछ सेवाएं दे रहे हैं।

आमिर पर्यटन मंत्रालय के अतुल्य भारत विज्ञापन में पर्यटकों के साथ अच्छे सलूक का संदेश देते दिखाई देते हैं तो दूसरी तरफ २००९ के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने एक गैर सरकारी संस्था के जरिए साफ-सुथरे उम्मीदवारों को चुनने के अभियान में अपनी खूब सक्रियता दिखाई। कांग्रेस और सरकार के लिए भी आमिर ऐसे अभिनेता बन गए हैं जिन्हें सिर आंखों पर बिठाया जा रहा है। वह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के चहेते बने हुए हैं। यही वजह रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के समय प्रधानमंत्री ने जिन गण्यमान्य लोगों को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया था उनमें आमिर को खास तौर पर बुलाया गया था। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक,यदि शाहरूख को भी इसमें बुलाया जाता,तो आमिर नहीं आते। इसलिए,आमिर को बुलाना मुनासिब समझा गया। हाल में,आमिर बच्चों में कुपोषण की रोकथाम के लिए एक अभियान में शामिल हुए हैं जिसमें लगभग सभी दलों के युवा सांसद शामिल हैं। इसी सिलसिले में,संसद पहुंचे आमिर को प्रधानमंत्री से मिलने के लिए पांच मिनट का वक्त मिला था पर मुलाकात हुई तो बातों का सिलसिला आधे घंटे तक चल पड़ा। सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से आमिर खान को खूब समर्थन मिल रहा है। वहीं,मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और शहरी विकास मंत्रालय ने स्कूलों में स्वच्छता कार्यक्रम के लिए आमिर को ब्रांड एंबेसडर बनाया है। आमिर अच्छे फिल्म निर्माता और अभिनेता के अलावा,अच्छे रणनीतिकार माने जाते हैं। यह उनकी रणनीति का ही हिस्सा रहा है कि पीपली लाईव के प्रदर्शन के बाद आमिर ने प्रधानमंत्री के आवास पर उन्हें विशेष तौर पर यह फिल्म दिखाई थी। इसके तुरंत बाद,उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं और सांसदों के लिए भी इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की। पिछले सप्ताह संसद पहुंचने पर आमिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी से तो मिले ही,साथ में लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा में विपक्ष के नेता सुषमा स्वराज औऱ लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार से भी मुलाकात की(प्रतिभा ज्योति,नई दुनिया,दिल्ली,12.12.2010)।

Monday, November 15, 2010

अधूरी तैयारियों के बीच जारी है कोलकाता फिल्मोत्सव

16 वें कोलकाता फिल्मोत्सव के तीन दिन बीत जाने केबावजूद कमियां जगह-जगह उजागर हो रही हैं। प्रबंधन कमियों की जानकारी के बाद भी अपने दायित्व से पल्ला झाड़ रहा है, वहीं मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य राजनीति में व्यस्त हैं। इससे दर्शकों में न सिर्फ नाराजगी है, बल्कि वे महोत्सव के चार दिन बाकी रहने के बावजूद अभी से उसे फ्लाप शो बता रहे हैं। राज्य सरकार घोषणा के बावजूद मशहूर फिल्मकार स्वर्गीय सत्यजीत राय के चर्चित वृत्तचित्र सिक्किम दिखाने में विफल रही। पहले तो नंदन के सीईओ नीलांजन चटर्जी ने कहा था कि सिक्किम वृत्तचित्र हर हाल में प्रदर्शित किया जायेगा लेकिन जब सिक्किम की अदालत ने रोक लगाने का निर्देश दिया तो वामो सरकार खामोश हो गयी। अब फिर से सिक्किम दिखाने के लिए सरकार ने पहल शुरू की है। संबंधित संस्था को प्रक्रिया के तहत चिट्ठी लिखी दी गयी है। मालूम हो कि महोत्सव के शुरू में सिक्किम की संस्था द आर्ट एंड कल्चर ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी उगेन चेपल ने कहा था कि उनके पास सिक्किम वृत्तचित्र का कापी राइट अधिकार सुरक्षित है, इसलिए उनकी अनुमति जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार का रवैया ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती महोत्सवों में सबकी राय सुनी जाती थी लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है। उल्लेखनीय है कि पहले दिन सिक्किम का एक शो हुआ, जबकि महोत्सव में सात दिन दिखाने का निर्णय किया गया था। बांग्ला फिल्म के समीक्षक डा. संजय मुखर्जी ने तो सिक्किम की सीडी पर सवाल खड़ा किया और कहा कि उसके असली होने में भी संदेह है। गुरुवार को जापान के नामचीन निर्देशक कुरुसावा की वर्ष 1985 में प्रदर्शित फिल्म रैन रवींद्र सदन प्रेक्षागृह में दिखायी जा रही थी। कुछ देर बाद प्रोजेक्टर में गड़बड़ी आ गयी। काफी देर तक दर्शक इंतजार करते रहे बावजूद उसके प्रबंधन ने क्षमायाचना नहीं की। इस बीच दर्शकों का मन बहलाने के लिए हिन्दी व बांग्ला के गाने दिखाये गये, जिससे नाराज दर्शक हाल से बाहर निकल गये। शुक्रवार को वियतनामी फिल्म द लीजेंड इज एलाइव फिल्म दिखायी जा रही थी, तभी स्क्रीन पर गड़बड़ी देखी गयी। वियतनामी फिल्म के बदले भारतीय फिल्म लाइफ गोज आन दिखायी गयी। इससे नाराज दर्शक उत्तेजित हो गये और आयोजक को जमकर कोसा। इसी तरह की गड़बडि़यां अन्य प्रेक्षागृहों में भी देखी जा रही हैं। महोत्सव के पदाधिकारी नीलांजन चटर्जी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं और सरकार भी चुप है(दैनिक जागरण,सिलीगुड़ी,15.11.2010)।

Friday, November 12, 2010

कॉपीराइट उल्लंघन के खिलाफ अदालत जाएंगे अमिताभ

बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन लगातार हो रहे कॉपीराइट उल्लंघन और उत्पादों के प्रचार के लिए उनके नाम के अवैध इस्तेमाल के चलते गुस्से में हैं।

अमिताभ ने अपने ब्लॉग पर लिखा है, "मैंने वकीलों से बात की है और हम अदालत जाएंगे। जब लोग ई-मेल के जरिए अपना व्यापार चलाते हैं तब वे ऐसा करते हैं। जब तक उन्हें इसका सबक नहीं सिखाया जाएगा तब तक वे सही रास्ते पर नहीं आएंगे।"

अमिताभ ने लिखा है, "सुबह से अब तक कॉपीराइट उल्लंघन के कई मामले आ चुके हैं।"

उन्होंने बताया है कि किस तरह एक कम्पनी 'लक्ष्मी फूड्स' विज्ञापन में उनके रिएलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' की नकल करते हुए बासमति चावल बेच रही है।

अमिताभ के मुताबिक इस विज्ञापन में केबीसी जैसा ही सेट तैयार किया गया है और उत्पाद बेचने के लिए उनकी आवाज की नकल की गई है जो कि अनैतिक और कानूनी तौर पर गलत है।

दूसरा कॉपीराइट उल्लंघन मोबाइल व टेलीफोन कम्पनी एयरटेल ने किया है। अमिताभ के मुताबिक एयरटेल के एक विज्ञापन में उनसे बात करने का अवसर दिए जाने की बात कही जा रही है जबकि उनका कम्पनी के साथ ऐसा कोई अनुबंध नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कम्पनी ने इसे एक गलती बताया है लेकिन उसे इसके लिए माफ नहीं किया जा सकता(भास्कर डॉटकॉम,12.11.2010)।

Thursday, November 4, 2010

बदनाम मुन्नी ने दोगुनी कर दी झंडु बाम की बिक्री

झंडु बाम को ऐसा पीड़ाहारी बाम बताया जाता है, जिसमें जांची-परखी जड़ी-बूटियां होती हैं। हालांकि, हाल के महीनों में जोरदार ढंग से बढ़ी इसकी बिक्री के पीछे ऐसी किसी जड़ी-बूटी का नहीं, बल्कि किसी और चीज का हाथ दिख रहा है। झंडु बाम बनाने वाली कोलकाता की कंपनी इमामी लिमिटेड ने सितंबर की शुरुआत में फिल्म दबंग के प्रोड्यूसर अरबाज खान पर मुकदमा कर दिया। इसकी वजह थी, फिल्म के एक हिट गाने में झंडु बाम शब्द का इस्तेमाल। विवाद रंग लाया।

सलमान खान की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म से जुड़े विवाद के बीच इमामी जुलाई-सितंबर तिमाही में झंडु बाम की दोगुनी बिक्री की गवाह बनी। इस दौरान बाम की बिक्री करीब 35 फीसदी बढ़ी। इमामी के लिए झंडु अब सबसे अधिक बिकने वाला ब्रांड बन गया है। कंपनी की आमदनी में उसकी हिस्सेदारी अब करीब 23 फीसदी है, जबकि पहले यह आंकड़ा 17-18 फीसदी हुआ करता था। झंडु बाम ने नवरत्न तेल ब्रांड को पीछे छोड़ दिया है, जो आमतौर पर करीब 20 फीसदी की हिस्सेदारी देता है। इसी उत्साह का फायदा उठाने के लिए इमामी ने झंडु बाम के दाम तक नहीं बढ़ाए, जबकि इसमें इस्तेमाल होने वाले अहम कच्चा माल मेंथॉल की कीमतें बीते साल भर में बढ़कर दोगुनी हो गई हैं।

इमामी ने सोमवार को दूसरी तिमाही में अब तक के सबसे बढि़या आंकड़े पेश किए, जिससे कंपनी का पहली छमाही का प्रदर्शन सुधर गया और अब उसे लगता है कि आगे इसे जारी रखना आसान नहीं होगा। इमामी लिमिटेड के निदेशक मोहन गोयनका ने ईटी से कहा, 'दूसरी तिमाही के प्रदर्शन का मुख्य आधार झंडु बाम रहा है, जिसने इमामी को पहली छमाही में अब तक के सबसे बढि़या आंकडे़ दर्ज करने में मदद दी।'

झंडु बाम-दबंग विवाद सितंबर की शुरुआत में सामने आया। हालांकि, यह विवाद बाद में अदालत के बाहर निपटा और सितंबर के अंत में नया विज्ञापन प्रसारित होना शुरू हुआ। नए कमर्शियल में दबंग के गाने की क्लिपिंग थी। इमामी के निदेशक आदित्य अग्रवाल ने कहा, 'हम अब भी वही कमर्शियल प्रसारित कर रहे हैं, जो काफी लोकप्रिय हो गया है।' अग्रवाल ने बताया कि दबंग में मुन्नी का किरदार अदा करने वाली मलाइका अरोड़ा खान को झंडु बाम का ब्रांड एम्बेसेडर बनाने की बात हो रही है।

उन्होंने कहा, 'यह सच है कि विवाद से झंडु बाम की बिक्री को काफी मदद मिली, क्योंकि इसने ब्रांड को याद रखने में अहम किरदार अदा किया। इस महीने भी झंडु बाम की बिक्री मजबूत रही है और देश के सभी हिस्सों से आने वाले आंकडे़ यही कह रहे हैं। लेकिन, दूसरी तिमाही में ब्रांड के साथ हमने इससे अलग भी काफी कुछ किया, जिसने अपनी भूमिका निभाई है। इसकी नई पैकेजिंग इसमें शामिल है।'

ब्रांड कंसल्टेंट हरीश बिजूर को लगता है कि इमामी के लिए इस गाने ने काफी बड़ा किरदार अदा किया। बिजूर ने कहा, 'काफी हद तक यह दबंग का असर है। खास तौर से ग्रामीण इलाकों के बाजारों में इससे काफी मदद मिली है। यह गाना कई तरह से इमामी के लिए जिंगल बन गया है। इससे कंपनी को काफी फायदा हुआ है।' झंडु की भारतीय बाम बाजार में 43 फीसदी हिस्सेदारी है(ऋतंकर मुखर्जी,इकनॉमिक टाइम्स,कोलकाता,2.11.2010)।

Tuesday, October 26, 2010

तेलुगुदेशम को डीएमके का जवाब है रक्तचरित्र

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ए राजा को हटाए जाने और स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच संयुक्त संसदीय समिति से कराए जाने की तेलुगूदेशम पार्टी की मांग और इस शुक्रवार को रिलीज हुई रामगोपाल वर्मा की फिल्म रक्त चरित्र-१ में क्या संबंध हो सकता है? न सिर्फ ये सवाल चौंकाने वाला है बल्कि इसका जवाब इससे भी ज्यादा हैरान करने वाला है।

भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक डीएमके कोटे के मंत्री पर कीच़ड़ उछालने वाली तेलुगूदेशम पार्टी के संस्थापक एन टी रामाराव के सियासी कारनामों को उजागर करने के लिए ही रक्तचरित्र का निर्माण किया गया है और इसके पीछे जिस शख्स के दिमाग और पैसे ने काम किया, वह और कोई नहीं बल्कि डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि के पोते दयानिधि अझागिरी हैं। दक्षिण की राजनीति में आने से पहले अपने फिल्मी किरदारों के चलते पूरे आंध्र प्रदेश में पूजे जाने वाले दिवंगत एन टी रामाराव ने ही तेलुगूदेशम पार्टी की स्थापना की और लंबे वक्त तक दक्षिण की राजनीति के जरिए केंद्र की सियासत को प्रभावित किया। नेशनल फ्रंट के गठन के समय से ही केंद्र की सत्ता में एक पाले में रही तेलुगूदेशम और डीएमके रिश्तों में खटास एनडीए के पहली बार गठन के वक्त आई थी। बाद में तमिलनाडु और आंध्र-प्रदेश दोनों ही राज्यों में सत्ता संतुलन बदलने से ये सियासी रिश्ते भी बनते बिग़ड़ते रहे लेकिन, तेलुगू देशम ने डीएमके पर सीधा निशान इस साल मई के पहले हफ्ते में साधा। इसके पोलित ब्यूरो सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री के येरन्नाायडू ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर न सिर्फ स्पेक्ट्रम घोटाले की चपेट में आए दूरसंचार मंत्री ए राजा को मंत्रिमंडल के बर्खास्त करने की मांग की बल्कि पूरे मामले की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति गठित करने की मांग की। निर्देशक रामगोपाल वर्मा के करीबी सूत्रों की मानें तो तेलुगूदेशम पार्टी की छवि पर हमला करने की योजना इसके बाद ही बनी।

इस फिल्म में प्रजा देशम पार्टी के बहाने और शत्रुघ्न सिन्हा को एन टी रामाराव के चोले में पेशकर ये बताने की कोशिश की गई है कि कैसे तेलुगूदेशम पार्टी ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए अपराधी तत्वों का सहारा लिया। फिल्म के कथानक को लेकर आंध्र-प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। तेलुगूदेशम के नेता इस फिल्म को रामाराव की छवि को ध्वस्त करने की साजिश बता रहे हैं।

फिल्म की शुरुआत में इसके निर्माता के रूप में दयानिधि अझागिरी की कंपनी क्लाउड ९ का नाम देखकर एक नया हंगामा शुरू हो गया है। दयानिधि के पिता एम के अझागिरी केंद्र में रसायन और उर्वरक मंत्री है और उनकी राजनीतिक महात्वाकांक्षाएं अक्सर अपने भाई स्टालिन की सियासत में रुकावटें डालती रही हैं। आंध्र प्रदेश में रक्तचरित्र के तेलुगू संस्करण को देखने वालों का कहना है कि ये फिल्म एन टी रामाराव की वहां अब तक बनी रही छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर रही है और पार्टी के कुछ नेता इसके खिलाफ अदालत की शरण लेने का भी मन बना रहे हैं। इस बारे में फिल्म के निर्देशक राम गोपाल वर्मा कुछ नहीं कहना चाहते(पंकज शुक्ल,नई दुनिया,दिल्ली,26.10.2010)।

Tuesday, October 5, 2010

घर से बेदखल मनोज तिवारी बिग बॉस के घर गए

भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक मनोज तिवारी बिग बॉस के मेहमान तो बन गए हैं लेकिन चौंकाने वाली खबर यह है कि वह अपने खुद के घर से बेदखल कर दिए गए हैं। घर टूटने की जो वजह उनकी निजी जिंदगी में बनी, वह उनके साथ बिग बॉस के घर में भी है। उधर, मनोज तिवारी को घर से बाहर कर चुकीं उनकी पत्नी रानी कहती हैं, वह वहां भी अकेले नहीं हैं।

टी सीरीज के दफ्तरों में कभी अपने भोजपुरी लोकगीतों का अलबम बनाने के लिए चक्कर लगाने वाले मनोज तिवारी की गिनती अब भी भोजपुरी सिनेमा के चोटी के तीन सितारों में होती है। उनकी अरसे से तमन्नाा रही है कि वह भी सिनेमा में अपने प्रतिद्वंद्वी रवि किशन की तरह बिग बॉस के मेहमान बनें। वह पिछले सीजन से ही इस कोशिश में लगे रहे। बिग बॉस में शामिल होने के लिए किसी न किसी विवाद में शामिल रहना पहली शर्त माना जाता है। मनोज तिवारी का चयन इस कार्यक्रम में अपनी सह अभिनेत्री श्वेता तिवारी के साथ उनके कथित रिश्तों के सुर्खियों में रहने की वजह से ही हुआ। दोनों के रिश्तों के बारे में तफ्तीश के दौरान ही नईदुनिया को पता चला कि मनोज की पत्नी रानी ने उन्हें अलग रहने का न सिर्फ नोटिस दिया है बल्कि अलग रहना शुरू भी कर दिया है।

बिग बॉस में जाने से पहले मनोज तिवारी ने अपने कानूनी सलाहकारों से इस बात पर चर्चा भी की । समझा जा रहा है कि वह अपनी काफी संपत्ति पत्नी के नाम होने से परेशान हैं। रानी तिवारी ने मनोज तिवारी का न सिर्फ घर में प्रवेश कई हफ्तों से बंद कर रखा है बल्कि उनका सारा सामान भी घर से बाहर करवा दिया है। सूत्रों के मुताबिक मनोज इन दिनों अपने दफ्तर को ही अपना आवास बनाकर रह रहे थे। यह स्थिति उनके बिग बॉस के घर जाने तक कायम थी। मनोज और श्वेता तिवारी ने दो साल पहले एक भोजपुरी फिल्म में साथ काम किया था। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान ही श्वेता ने अपने पति राजा चौधरी पर मारपीट करने का आरोप लगाया और अलग रहने लगीं।

मनोज ने उस झग़ड़े में श्वेता की खुलकर मदद की थी । इसके बाद से दोनों का एक दूसरे के घर आना जाना भी काफी ब़ढ़ गया था। मनोज तिवारी की पत्नी क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का काम देखने वाली कंपनी ऋति स्पोर्ट्स के निदेशकों में से एक हैं। इसके अलावा इन दिनों वह आहार सलाहकार के तौर पर भी काम कर रही हैं। नईदुनिया से बातचीत में रानी तिवारी ने माना कि कई हफ्तों से वह अकेले ही रह रही हैं और अपना व अपनी बेटी का खर्च चलाने के लिए काम भी कर रही हैं(पंकज शुक्ल,नई दुनिया,दिल्ली,5.10.2010)।

Monday, October 4, 2010

दक्षिण का भगवान और नक्सलवाद

देश में नेपाल की सीमा से लेकर आंध्र प्रदेश और उसके आगे केरल तक पसर चुके लाल गलियारे की पगडंडियों ने क्या कभी तेलुगूदेशम के संस्थापक और अभिनेता एनटी रामाराव के सहारे विस्तार पाया था? बाहुबल के सहारे चलने वाली देश की क्षेत्रीय सियासत पर शूल, सरकार और सरकार राज जैसी फिल्में बना चुके निर्माता निर्देशक रामगोपाल वर्मा इस बार इसी सवाल को दर्शकों के सामने लेकर आने वाले हैं। गांधी जयंती के दिन गांधी प्रतिमा के सामने सियासी हिंसा के खूनी खेल से शुरू होती इस फिल्म के कुछ अंश वर्मा ने पहली बार नईदुनिया को दिखाए। उन्होंने कहा कि सत्ता पाने के लिए हिंसा देश के तमाम राज्यों में जरूरी सीढ़ी बन चुकी है, इस हकीकत से अब इनकार नहीं किया जा सकता।

नईदुनिया से करीब डेढ़ घंटे तक चली खास मुलाकात में रामगोपाल वर्मा ने कहा कि केंद्र को कभी भी क्षेत्रीय ताकतों का उदय रास नहीं आया। दो शक्तियों के इस टकराव में जो सत्ता में काबिज है वह वर्दीधारी बाहुबल का इस्तेमाल करता है और जो सत्ता के लिए संघर्ष कर रहा है उसकी कोशिश गैरकानूनी हो जाती है। नक्सलवाद की जड़ में भी यही समस्या है। रामगोपाल ने अपनी नई फिल्म रक्तचरित्र में तेदेपा के मशहूर नेता परिताला रवि की कहानी के जरिए सत्ता के इसी संघर्ष का सच परदे पर दिखाने की कोशिश की है। आंध्र प्रदेश के जंगलों में दबदबा कायम करने वाले खूंखार नक्सली परिताला रवि को अपनी पार्टी का वर्चस्व बढ़ाने के लिए एनटी रामाराव ने शामिल कर लिया था। इसके बाद एक दशक तक हैदराबाद सियासी हिंसा के उफान के अलग अलग खूनी मंजर देखता रहा।

दक्षिण में पनपे नक्सलवाद के लिए रामाराव और चंद दूसरे नेताओं का संरक्षण मिलने की बात अब तक चर्चाओं में ही रही है, पहली बार किसी फिल्म में इस पर उंगली उठाई जा रही है। वर्मा मानते हैं, इसका विरोध भी उन्हें झेलना पड़ सकता है क्योंकि रामाराव को दक्षिण में भगवान की तरह पूजा जाता रहा है। रक्तचरित्र से शत्रुघ्न सिन्हा अरसे बाद किसी केंद्रीय किरदार के रूप में बड़े परदे पर आ रहे हैं। वर्मा यह मानने में कतई संकोच नहीं करते कि शत्रुघ्न सिन्हा का चरित्र रामाराव से प्रेरित है। अमिताभ बच्चन को फिल्म सरकार और सरकार राज के अलावा रण में भी निर्देशित कर चुके वर्मा मानते हैं कि ७० के दशक से उभरे इन दोनों सितारों की अपनी खासियत है लेकिन, शत्रुघ्न सिन्हा को वह ज्यादा स्टाइलिश और रुआबदार मानते हैं।

लाल गलियारे में विकास के लिए की गई नईदुनिया की पहल को रामगोपाल वर्मा देश में किसी मीडिया घराने की तरफ से की गई नायाब कोशिश मानते हैं। ऐसी शुरुआत करना साहस का काम है। एक साथ तीन भाषाओं तमिल, तेलुगू और हिंदी में बनी फिल्म रक्त चरित्र की पहली कड़ी २२ अक्टूबर को रिलीज होगी । इसका दूसरा हिस्सा वह नवंबर के आखिरी हफ्ते में रिलीज करेंगे(पंकज शुक्ल,नई दुनिया,दिल्ली,4.10.2010)।

Friday, September 24, 2010

'बदनाम' होकर भी मुन्नी झंडू बाम की 'डार्लिंग'

"दबंग" फिल्म में झंडू बाम के बोलों पर थिरकने वाली मलाइका अरोरा को अब झंडू बाम बनाने वाली कंपनी ने अपना ब्रांड एम्बैसडर बना दिया है। फिल्म के निर्माता और मलाइका के पति अरबाज खान ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ की पहल से कंपनी के साथ उनका जो झगड़ा था, वह खत्म हो चुका है और अब हम मिलकर काम करने वाले हैं। मलाइका झंडू बाम की ब्रांड एम्बैसडर होंगी।

बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई करने वाली दबंग में मुन्नी बदनाम हुई गाने में झंडू बाम शब्द के इस्तेमाल पर विवाद पैदा हो गया था। फिल्म के प्रदर्शन के बाद झंडू बाम बनाने वाली कंपनी ने फिल्म के निर्माता अरबाज खान के खिलाफ अदालत में याचिका दायर करते हुए कहा था कि कंपनी के इस ब्रांड का नाम बिना इजाजत इस्तेमाल किया गया है।

सूत्रों के मुताबिक प्रहलाद कक्कड़ के मलाइका और खान परिवार की तरह ही झंडू बाम कंपनी के मालिकों के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने दोनों को सुझाव दिया कि कानूनी लड़ाई लड़ने में दोनों का समय और पैसा बर्बाद हो जाएगा। कानूनी पचड़े में पड़ने के बजाय क्यों न बाहर ही कोई रास्ता निकाला जाए। इसके लिए दोनों पक्ष तैयार हुए और प्रहलाद कक्कड़ ने मलाइका को कंपनी का ब्रांड एम्बेसडर बनाने की पेशकश की, जिसे कंपनी ने स्वीकार कर लिया। सूत्र ने आगे बताया कि प्रहलाद कक्कड़ ही मलाइका को लेकर झंडू बाम का विज्ञापन करेंगे। हालाँकि इसके लिए मलाइका को पैसे दिए जाएँगे या नहीं, इस बारे में सूत्र बता नहीं पाए। कक्कड़ जल्द ही मलाइका को लेकर विज्ञापन की शूटिंग करने वाले हैं(चंद्रकांत शिंदे,नई दुनिया,इन्दौर,24.9.2010)।

Thursday, September 16, 2010

शिक्षक बदनाम हुआ चुलबुल पांडे तेरे लिए

सलमान खान की हालिया फिल्म दबंग का एक गाना "मुन्नी बदनाम हुई डार्लिंग तेरे लिए" आजकल खूब धूम मचा रहा है, लेकिन इस फिल्म के कारण राजस्थान के सीकर जिले का एक शिक्षक काफी बदनाम हो गया है। पिछले पांच दिन से सलमान खान के प्रसंशक इस शिक्षक को चैन नहीं लेने दे रहे। दरअसल, दबंग फिल्म के पोस्टर पर इस शिक्षक ओम प्रकाश जाखड़ के मोबाइल नंबर छप गए हैं, जिसके कारण उसे हर दिन सैकंड़ों की तादाद में कॉल्स आ रहे हैं। अब तो यह शिक्षक जहां भी जाता है इसके दोस्त गुनगुनाना शुरू कर देते हैं कि "शिक्षक बदनाम हुआ चुलबुल पांडे तेरे लिए।"

सलमान खान का कोई फैन मुंबई से फोन कर दबंग फिल्म में उनके रोल के लिए बधाई देता है तो कोई पटना से फोन कर चुलबुल पांडे (सलमान खान) से बात करने की जिद करता है। ओम प्रकाश जाखड़ लोगों को समझाते-समझाते तंग हो गया है कि वह कोई चुलबुल पांडे नहीं बल्कि एक निजी स्कूल का मालिक है, लेकिन फोन हैं कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहे। ओम प्रकाश सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में दी न्यू राजस्थान सीनियर सेकंडरी स्कूल चलाते हैं। पोस्टर पर सिर्फ ओम प्रकाश के मोबाइल नंबर ही नहीं बल्कि उसकी स्कूल के लैंडलाइन नंबर भी छप गए हैं। इस स्कूल की एक छात्रा चंचल मोरिया का फोटो भी पोस्टर में दिखाई दे रहा है। पोस्टर में स्कूल के नंबर और छात्रा का फोटो कैसे आया, इस बारे में ओम प्रकाश जाखड़ का कहना है कि मैं खुद यह जानकर आश्चर्य चकित हूं कि आखिर यह हुआ कैसे? जाखड़ का कहना है कि न तो मैं खुद कभी सलमान खान से मिला हूं और न कभी सलमान खान यहां आए हैं(आनंद चौधरी,नई दुनिया,दिल्ली,16.9.2010)।

Friday, September 10, 2010

थीम सांग के घमासान में दलेर मेहंदी भी कूदे

राष्ट्रमंडल खेलों के थीम सांग को लेकर मचे घमासान में दलेर मेहंदी भी मैदान में कूद पड़े हैं। ऑस्कर पुरस्कार विजेता एआर रहमान द्वारा गाए गीत- "ओ यारो इंडिया बुला लिया" के मुकाबले में दलेर मेहंदी ने अपनी बल्ले-बल्ले स्टाइल में एक खास गाना तैयार किया है-"खेल ले"। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की मौजूदगी में दिल्ली सचिवालय के खचाखच भरे सभागार में दलेर ने जब पंजाबी भांगड़ा का तड़का लगा हुआ खेलों को समर्पित अपना गीत गाया, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज गया। खुद शीला भी दलेर एंड पार्टी की धुनों पर झूमीं।

गुड़गांव में थीम सांग के लांच के मौके पर रहमान ने कहा था कि उनके लिए खेलों के महाकुंभ के लिए थीम सांग तैयार करना बड़ा मुश्किल काम था और पूरे छह महीने की मशक्कत के बाद वह यह गीत तैयार कर पाए। दिलचस्प बात यह हुई कि इतनी मेहनत के बाद कम्पोज किए गए उनके गीत को लेकर पहले ही दिन से विवाद शुरू हो गया। प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा सरीखे कई लोगों ने खुलेआम यह कहकर अपना विरोध दर्ज कराया कि यह गीत खेलों के थीम सांग होने के लायक नहीं है। तुर्रा यह भी, खेल आयोजन समिति ने इस गाने को बनाने के लिए रहमान को पांच करोड़ रुपए भी दिए।

दिल्ली सरकार के आला अधिकारी इस बात से साफ इनकार कर रहे हैं कि उनकी ओर से दलेर को थीम सांग बनाने के लिए कहा गया था। लेकिन अपना गाना पेश करने से पहले खुद दलेर ने कहा कि उन्हें महज तीन दिन पहले गाना तैयार करने के लिए कहा गया और उन्होंने पूरी कोशिश की है कि इसे बढ़िया से बढ़िया तरीके से पेश किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें थोड़ा सा और वक्त मिलता तो वह और बेहतर करके दिखलाते।

दलेर मेंहदी ने चौंकाने वाली खास टिप्पणी यह की कि वह अपना यह गीत बिल्कुल मुफ्त में अपने प्यारे मुल्क हिन्दुस्तान को समर्पित कर रहे हैं। रहमान द्वारा अपने गीत के लिए करोड़ों की रकम लेना और दूसरी ओर दलेर का यह कहना कि उन्होंने बिल्कुल मुफ्त में यह गाना तैयार किया है, लाजिमी तौर पर इशारा करता है कि इस मामले में गीत-संगीत की दुनिया में किस कदर बवाल मचा हुआ है। दलेर के गीत में बल्ले-बल्ले तो है ही, पार्श्व में सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा जैसे लोकप्रिय गीत की धुन भी चलती रहती है। जाहिर तौर पर ऐसा करके उन्होंने अपने गीत को हिन्दुस्तानियत के रंग में रंगने की पूरी कोशिश की है(अजय पांडेय,नई दुनिया,दिल्ली,10.9.2010)।

Thursday, September 9, 2010

रहमान की धुन पर थिरकने से इनकार !

ऑस्कर अवार्ड विजेता भारतीय संगीतकार ए.आर. रहमान की धुनों पर भले ही हर किसी के पैर थिरकने लगते हों, लेकिन देश के शीर्ष शास्त्रीय नर्तकों ने उनकी धुन पर नाचने से इंकार कर दिया है। रहमान ने इन खेलों के लिए जो धुन तैयार की है, उसे इन कलाकारों ने कच्चा बता कर ठुकरा दिया है। अब कथक गुरू बिरजू महराज और ओडिसी नृत्यांगना सोनल मानसिंह जैसे देश के छह शीर्ष कलाकार अपने लिए खुद संगीत बना रहे हैं। दैनिक जागरण के पास मौजूद दस्तावेज के मुताबिक, उद्घाटन समारोह के दौरान मंच पर छह शास्त्रीय विधाओं में होने वाले नृत्य को तैयार कर रहे गुरुओं ने राष्ट्रमंडल खेल के लिए गठित मंत्रियों के समूह (जीओएम) को साफ कह दिया है कि रहमान के संगीत पर नृत्य तैयार करना उनके लिए संभव नहीं। समारोह के बोधि वृक्ष नाम के सबसे महत्वपूर्ण खंड में शामिल इन कलाकारों का कहना है कि रहमान ने लंबे समय तक इस खंड के लिए कोई संगीत ही तैयार नहीं किया। अब जो संगीत उन्होंने बनाया भी है, वह इस लायक नहीं कि उस पर कोई ढंग का नृत्य पेश किया जा सके। इन्होंने जीओएम को कहा है कि यह तो गनीमत है कि इस पहलू पर उन्होंने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी और उनका संगीत भी लगभग तैयार है। सभी नृत्य रहमान की धुन पर नहीं नाचेंगे! गुरु साथ बैठ कर इसे अंतिम रूप दे रहे हैं। राष्ट्रमंडल खेलों के उद्घाटन समारोह के दौरान देश की शास्त्रीय नृत्य शैलियों पर आधारित खंड बोधि वृक्ष (ट्री ऑफ नॉलेज) में ए.आर. रहमान की बनाई एक ही धुन पर सभी शैलियों में एक साथ नृत्य होना था। कुल 480 शास्त्रीय कलाकारों को अपनी-अपनी शैलियों में इस धुन पर नृत्य करवाने की जिम्मेदारी सभी शैलियों के शीर्ष गुरुओं पर डाली गई थी। इन कलाकारों द्वारा जीओएम को अपनी समस्या बताए जाने के बाद समारोह के प्रबंधन का काम देख रही विजक्राफ्ट इंटरनेशनल एंटरटेनमेंट के क्रिएटिव प्रमुख भारत बाला ने भी माना है कि यह संगीत शास्त्रीय कलाकारों के मुफीद नहीं है। उनके मुताबिक, कलाकारों को अपने संगीत पर ही नृत्य करने दिया जाए। हालांकि, जीओएम नहीं चाहता कि इस विवाद का असर कार्यक्रम पर पड़े। उसने विजक्राफ्ट को साफतौर पर कह दिया है कि किस मामले पर किसका और किसके साथ मतभेद है, यह देखना इस कंपनी का काम है। अगर समय पर श्रेष्ठ कार्यक्रम नहीं हुआ तो उसे ही जिम्मेदार माना जाएगा। जीओएम ने भारत बाला को समापन समारोह हो जाने तक राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के दिल्ली स्थित दफ्तर में ही टिके रहने को कहा है, ताकि इस संबंध में सभी फैसले समय से लिए जा सकें(मुकेश केजरीवाल,दैनिक जागरण,दिल्ली,9.9.2010)।

Tuesday, September 7, 2010

मैच फिक्सिंग में भारतीय फिल्मी हीरोइनें?

आम तौर पर मैच फिक्सर पाकिस्तानी ही होते हैं लेकिन ऐसा भी नहीं कि भारत इस मामले में एकदम निर्दोष हो। जब भी पाकिस्तान ने मैच फिक्सिंग का कोई बड़ा घोटाला पकड़ा जाता है तो उसके तार भारत से जुड़ने स्वाभाविक हो जाते हैं। अब भी भारत के कई मैच फिक्सर्स के टेलीफोनों की जांच हो रही है और इस जांच के आधार पर भारत में भी कई बड़े कानूनी मामले बन सकते हैं।

मैच फिक्सिंग का दलदल पाकिस्तान के बाद अब हिंदुस्तान की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। लॉर्ड्स टेस्ट में मैच फिक्सिंग के आरोपों की जांच कर रही ब्रिटेन पुलिस ने 11 नाम भारत को दिए हैं। इन 11 हिंदुस्तानियों के नाम स्कॉटलैंड यार्ड को मोहम्मद आसिफ के मोबाइल फोन से मिले हैं। इनमें 5 बॉलीवुड अभिनेत्रियों के नाम भी शामिल हैं। डेटलाइन इंडिया ने अपनी पड़ताल में पाया है कि पाक का ये नापाक क्रिकेटर इन भारतीय अभिनेत्रियों से ना सिर्फ फोन पर बातें करता था बल्कि कई बार मिल भी चुका है। अब भारतीय जांच एजेंसियों को ये पता करना है कि इन मुलाकातों का मकसद क्या था।

डेटलाइन इंडिया को पुलिस सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक आईपीएल सीजन वन के दौरान और उसके बाद से आसिफ की इन अभिनेत्रियों से मुलाकात और बातें हुईं। एक या दो बार नहीं बल्कि कई-कई बार। सूत्रों से मिली खबर के मुताबिक इनमें से एक बॉलीवुड अभिनेत्री से आसिफ मिलता रहा। उससे आसिफ की पहली मुलाकात आईपीएल सीजन वन के दौरान दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में हुई।

कमरे का नंबर था 6073। इसके बाद मुंबई में भी दोनों मिले और फिर बातचीत का सिलसिला जारी रहा। कभी फोन पर तो कभी इंटरनेट पर। आसिफ और इस अभिनेत्री की मुलाकात शारजाह और अबू धाबी में भी हुई। मुंबई पुलिस के सूत्र तो यहां तक बता रहे हैं कि ये हिरोइन तीन तीन नंबरों से आसिफ से बातें किया करती थी। लाख टके का सवाल एक कि क्या एक फिक्सर से की गई बातें मैच फिक्सिंग के बारे में ही होती थीं? ये अभिनेत्री कई भोजपुरी फिल्मों में भी काम कर रही है और कहीं न कहीं मोहम्मद आसिफ ने मैच फिक्सिंग का काला पैसा इन फिल्मों में लगाने का वादा भी किया था।

वैसे सच ये भी है कि ये सभी टॉप की हिरोइनें नहीं हैं। क्रिकेट की कई पार्टियों में उन्हें देखा गया है। डेटलाइन इंडिया के पास सभी अभिनेत्रियों के नाम हैं, लेकिन इनका खुलासा नहीं किया जा सकता। इनमें से एक बंगाल से आती है तो दूसरी दिल्ली से। दोनों ने ही कुछ छोटे बजट की फिल्मों में लीड रोल किया है साथ ही फिल्मों से पहले मॉडलिंग भी की है। इसके अलावा दो और चेहरे भी हैं जिनमें से एक मॉडल है और ग्लैमर के सर्किट में उसका आना जाना है। देखना ये है कि स्कॉटलैंड यार्ड को भारतीय जांच एजेंसियां इन पांचों देवियों के बारे में क्या कुछ जानकारी मुहैया करवा पाती हैं।

आसिफ के बॉलीवुड की अभिनेत्रियों से संबंध कहीं ना कहीं ये भी साफ करते हैं कि उसके दिल में बॉलीवुड के लिए खास जगह है। आसिफ भी हिंदी फिल्म का हीरो बनने की ख्वाहिश रखता है। इस चाहत का खुलासा खुद आसिफ ने आज से 4 साल पहले भारतीय टीम की मौजूदगी में किया था। जनवरी 2006 में लाहौर में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के तत्कालीन बॉलिंग कोच आकिब जावेद के घर पर ईद की पार्टी थी। सीरीज शुरू होने से पहले दी गई ये दावत खासतौर पर भारतीय टीम के लिए थी, इसमें पाकिस्तानी टीम के भी ज्यादातर खिलाड़ी शरीक हुए थे।पार्टी में जब आकिब जावेद ने आसिफ का परिचय लोगों से कराया तो किसी ने कहा कि ये तो फिल्मी हीरो की तरह दिखता है।

ये सुनकर आसिफ के साथ आए दोस्त ने फौरन हाथ जोड़कर कहा कि भाई कुछ मत बोलो इसको। बंदे के दिमाग में पहले से ही स्टार बनने का भूत सवार है। बातचीत में आसिफ ने भी भारतीय रिपोर्टरों से अपने दिल की बात बताई थी। आसिफ ने कहा था कि मैं एक दिन बॉलीवुड में काम करुंगा, महेश भट्ट की एक पिक्चर करनी है मुझे। पाकिस्तानी क्रिकेटरों का बॉलीवुड प्रेम कोई नई बात नहीं है। इमरान और जीनत अमान हों या फिर मोहसिन खान और रीना रॉय। हालिया सानिया शोएब शादी हो या फिर सुष्मिता का नाम वसीम अकरम के साथ जोड़ा जाना।

ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच पिछले वर्ष खेले गए सिडनी टेस्ट पर मंडरा रहे फिक्सिंग के काले बादल गहरा गए हैं। एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने सट्टेबाज मजहर माजिद के साथ कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों की तस्वीर प्रकाशित की है। ये तस्वीर पाक के ऑस्ट्रेलियाई दौरे के दौरान ली गई थी। द ऑस्ट्रेलियन की इस तस्वीर में उन्हें सिडनी टेस्ट के तीन सप्ताह बाद पर्थ के एक होटल में डिनर करते दिखाया गया है।

इस तस्वीर से सिडनी टेस्ट पर मंडरा रहे फिक्सिंग के बादल और गहरा गए हैं। पाकिस्तान एक वक्त बेहद मजबूत स्थिति में होने के बावजूद ये मैच हार गया था। अब स्पॉट फिक्सिंग के भंडाफोड़ में सिडनी टेस्ट भी सवालों के घेरे में आ गया है और ऐसा माना जा रहा है कि यह फिक्स था।

पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज यासिर हमीद ने स्पॉट फिक्सिंग मामले का भंडाफोड़ करने वाले ब्रिटिश अखबार न्यूज ऑफ द वर्ल्ड से बातचीत में दावा किया था कि सिडनी टेस्ट में हमारे साथी खिलाड़ियों ने फिक्सिंग के जरिए 18 लाख पाउंड की कमाई की थी(अंशू सिंह,डेटलाईनइंडिया डॉट कॉम,7.9.2010)।

Monday, September 6, 2010

बॉलीवुड में अब बंद हुआ होंठ हिलाना

बॉलीवुड में अब सुर में सुर मिलाने के दिन खत्म हो गए। पीछे गाना बचता रहता है और हीरो-हिरोइन सिचुएशन के हिसाब से एक्टिंग करते हैं । ये नया ट्रेंड इन दिनों तक रीबन सभी हिन्दी फिल्मों में देखने को मिल रहा है। प्रकाश झा की ‘राजनीति’ देखें या करण जौहर की ‘माइ नेम इज खान’, ‘कुरबान’ या ‘रॉकेट सिंह’ या शाहिद क पूर की ‘पाठशाला’या फिर विशाल भारद्वाज जैसे संगीतकार और फिल्मकार की ‘कमीने’ या उन्हीं की प्रोडक्शन की ‘इश्किया’ जैसी फिल्में। इनमें हीरो या हीरोइनों पर गाने तो खूब फिल्माए गए हैं , लेकिन सब बैक ग्राउंड में बजते हैं । बुदबुदाना करीब-करीब बंद हो गया है। भारतीय फिल्मों के पार्श्वगायन में तेजी से आ रहे इस बदलाव की शुरुआत वैसे तो क्षेत्रीय फिल्मों में हो गई थी, लेकिन इसे अब बॉलीवुड तेजी से अपना रहा है। प्रकाश झा जैसे फिल्मकारों का भी मानना है कि हीरो या हीरोइन के चरित्र का परंपरागत दृष्टिकोण बदल गया है। ऐसे में संगीत के पुराने मानदंडों में भी बदलाव तय है। एक तर्क यह है कि हिन्दी सिनेमा के नाच-गाने को पश्चिमी दर्शकों ने कभी खास स्वीकार नहीं किया। ऐसे में जबकि बॉलीवुड पूरी दुनिया को लुभाने की कोशिश में है, यह खुद में बदलाव ला रहा है। एक तर्क यह भी है कि वास्तविकता की ओर झुक रहे बॉलीवुड के हीरो को अगर गाना नहीं आता है तो उसे अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए बैकग्राउंड में गाना तो देना ही पड़ेगा। नया ट्रेंड राजनीति, कुरबान, इश्किया, कमीने जैसी फिल्मों में कुछ गाने बिना लिप्सिंग के फिल्माए गए (अमिताभ पाराशर,हिंदुस्तान,दिल्ली,6.9.2010)।

Tuesday, August 24, 2010

कोला कंपनियों का काला सच दिखाएंगे शेखर कपूर

देश में पेयजल की किल्लत जैसी गंभीर समस्या पर फिल्म पानी बनाने की तैयारी कर रहे, प्रख्यात निर्देशक शेखर कपूर ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। साथ ही उन्होंने इन कंपनियों का विज्ञापन करने वाले फिल्मी सितारों से ऐसे सवाल कर डाले हैं, वे जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। मासूम, मिस्टर इंडिया और बेंडिट क्वीन जैसी फिल्मों के निर्देशक ने फिल्मी सितारों से पूछा है, मल्टी नेशनल कंपनियां, जो किसानों का पानी हड़प कर अपना धंधा चला रही हैं, हकीकत सामने आने के बाद क्या आप लोग अब भी इनके विज्ञापन करना चाहेंगे?

किसानों का हाल: देश के कई हिस्सों में किसानों ने सूखे के लिए काफी हद तक कोक व्यवसाय को जिम्मेदार ठहराया है। भारत में कोक के कुल 52 प्लांट हैं। केरल के प्लाचीमाडा में तो इस वजह से जमीन का पानी ही खत्म हो गया है। यहां के लोगों को सरकारी टैंकर से अपनी प्यास बुझानी पड़ती है।

शेखर के तीर : शेखर कपूर ने ट्वीट में पूछा, अगर आपको पता लगे कि कोका-कोला हमारी जमीन से पानी निकालकर मीलों तक फसलों को बर्बाद कर रही है, तब भी इसे पीना चाहेंगे? अगर साबित हो जाए कोक किसानों का पानी चुराकर उनकी जिंदगी से खेल रही है, तो क्या हमारे सितारे कोक और पेप्सी के विज्ञापन करेंगे? अगर हमारे सितारे विज्ञापन करने से इंकार कर देते हैं, तो क्या आप उनकी फिल्में देखना बंद कर देंगे? ट्विटर पर जब व्यक्ति ने कपूर से पूछा कि क्या उनके पास अपने बयान के समर्थन में सुबूत हैं? उन्होंने कहा, मैं अभी लंदन जाने के लिए एयरपोर्ट पर हूं, वहां पहुंचकर आपको सुबूत दूंगा कि कोक किसानों का पानी चुराती है।

सितारे खामोश : कोक के सवालों पर विज्ञापन करने वाले अभिनेताओं ने अभी तक अपना मुंह नहीं खोला है। उल्लेखनीय है कि आमिर खान, इमरान खान, कल्कि कोएचलिन कोका कोला के ब्रांड एंबेसडर हैं, जबकि रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण पेप्सी तथा अक्षय कुमार थम्स अप को प्रमोट करते हैं(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,24.8.2010 में मुंबई की ख़बर)।

Saturday, August 21, 2010

अभिनेत्री रितू पांडेय का ‘कास्टिंग काउच’

कास्टिंग काउच (फिल्मों में भूमिका दिलाने के एवज में यौन शोषण) की बीमारी हिंदी फिल्म उद्योग की सीमा लांघ गई है। अब यह भोजपुरी फिल्म उद्योग को संक्रमित कर रही है। भोजपुरी फ़िल्मों की अभिनेत्री रितू पांडेय ने कास्टिंग निर्देशक वंश पाठक पर ‘कास्टिंग काउच’ का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने कैरियर के लिए समझौता करने को कहा था, जिसके आधार पर वंश के खिलाफ़ एक असंज्ञेय अपराध का मामला दर्ज कर लिया गया है.

पुलिस ने कहा कि भोजपुरी अभिनेत्री रितू ने आज दोपहर बाद पुलिस से संपर्क किया और आरोप लगाया कि वंश ने उसे फ़ोन करके और आपत्तिजनक टेक्स्ट संदेश भेजकर कहा था कि उसे यदि अपने कैरियर को आगे बढ़ाना है तो समझौता करना होगा यानी मनमानी करने की छूट देनी होगी.

कनकिया पुलिस स्टेशन में वरिष्ठ इंसपेक्टर अविनाश सावंत ने कहा कि रितू की शिकायत के आधार पर वंश पाठक के खिलाफ़ असंज्ञेय मामला दर्ज कर लिया गया है और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा.

कम से कम 15 भोजपुरी फ़िल्मों में अभिनय का दावा करने वाली रितू ने कहा कि वह हाल ही में एक मित्र के माध्यम से वंश पाठक से मिली थीं. उसने कहा कि मैंने उनसे फ़िल्मों में काम देने के लिए कहा था. हालांकि मैं उन्हें गोरेगांव में जब मिली थी तब से ही वह मुझसे समझौता करने के लिए कह रहे थे.

सावंत ने कहा कि इन दावों की जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर प्रारंभिक जांच के बाद निर्देशक के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी.