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Thursday, July 22, 2010

मेरा जलवा जिसने देखा...

पुराने दौर की डांसर-एक्ट्रेस में एक चर्चित नाम कुमकुम का भी है। साठ और सत्तर के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री कुमकुम ने अपना फिल्मी कॅरियर बतौर डांसर ही शुरू किया था। बहुत कम लोग जानते होंगे कि भोजपुरी सिनेमा की वे पहली हीरोइन रही हैं। उसी जमाने की यादों के सहारे कुमकुम आज मुंबई में खार स्थित अपनी बहुमंजिला बिल्डिंग 'कुमकुम' में खुशहाल जिंदगी बिता रही हैं।
वर्ष 1954 में रिलीज 'आर पार' प्रोड्यूसर-डायरेक्टर गुरूदत्त और संगीतकार ओ. पी. नैयर के कॅरियर के लिए तो महžवपूर्ण साबित हुई ही, इस हिट फिल्म से नई डांसर कुमकुम को भी इंडस्ट्री में अलग पहचान मिली। दरअसल इस फिल्म का टाइटल सॉन्ग 'कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर' शुरूआत में जगदीप पर फिल्माया गया था, जिसे सेंसर बोर्ड ने इस आपत्ति के साथ फिल्म से हटा दिया था कि यह गीत किसी लडकी पर फिल्माया जाना चाहिए था। फिल्म रिलीज पर थी और उस जमाने की किसी भी जानी-मानी डांसर के पास डेट्स नहीं थीं, इसलिए गुरूदत्त को मजबूरन यह गीत कुमकुम पर पिक्चराइज करना पडा। बाद में फिल्म 'आर पार' और इसके गीत-संगीत ने जो इतिहास रचा, वो जगजाहिर है।
पटना के पास स्थित हुसैनाबाद के जागीरदार नवाब मंजूर हसन खान की बेटी कुमकुम (असली नाम-जेबुन्निसा) का बचपन पटना और कोलकाता में बीता। हाल ही एक मुलाकात में कुमकुम ने अपने बचपन के दौर को याद करते हुए बताया, 'एक जमाना था जब हमारे खानदान के पास बेशुमार जमीन-जायदाद थी। देश की आजादी के बाद नवाबी चली गई, आमदनी के तमाम जरिए खत्म हो गए। नवाबी शानो-शौकत बरकरार रखने की कोशिशों में माली हालात बिगडते चले गए। मजबूरन हमें पटना छोडकर कोलकाता जाना पडा। मेरी उम्र उस वक्त पांच बरस की थी। डांस का शौक मुझे बचपन से था, इसलिए कोलकाता में पढाई पूरी करने के बाद मैं लखनऊ आकर शंभू महाराज से कथक सीखने लगी।'
घूमने के मकसद से कुमकुम 1952 में मुंबई आई, जहां संगीतकार नौशाद पहले से उन्हें जानते थे। नौशाद के जरिए इंडस्ट्री में यह बात फैलते देर नहीं लगी कि एक नई लडकी आई है, जो बहुत अच्छा डांस करती है। नतीजन कुमकुम के सामने फिल्मों में डांस के ऑफर आने लगे। डायरेक्टर शाहिद लतीफ की 1952 में बनी फिल्म 'शीशा' कुमकुम की पहली फिल्म थी, जिसके एक गीत में उन्होंने डांस किया था। उसी दौरान उन्होंने अपने असली नाम को बदलकर स्क्रीन नेम कुमकुम रख लिया। सोहराब मोदी की फिल्म 'मिर्जा गालिब'(1954) में भी उन्हें डांस करने का मौका मिला। लेकिन कुमकुम की असली पहचान बनी फिल्म 'आर पार' के टाइटल सॉन्ग से। बाद में भी कुमकुम पर फिल्माए- कैसी लगे जाए जिया (एक ही रास्ता), तेरा जलवा जिसने देखा (उजाला), जा जा रे जा बालमवा (बसंत बहार), ऎ दिल है मुश्किल जीना यहां (सीआईडी), रेशमी सलवार कुर्ता जाली का (नया दौर), तेरा तीर ओ बे-पीर (शरारत), मधुबन में राधिका नाचे रे (कोहिनूर), इस रात की तन्हाई में (दिल भी तेरा हम भी तेरे), दीया ना बुझे री आज हमारा (सन ऑफ इंडिया), मेरा नाम है चमेली (राजा और रंक) और मेरी सुन ले अरज बनवारी (आंखें) जैसे कई गीत मशहूर हुए।
गुरूदत्त की ही 'मिस्टर और मिसेज 55' अभिनेत्री के तौर पर कुमकुम की पहली फिल्म थी, जिसमें उन्होंने पांच बच्चों की मां का रोल किया था। उसी दौरान कुमकुम ने 'करोडपति', 'प्यासा', 'फंटूश', 'मदर इंडिया', 'सुवर्ण सुंदरी', 'घर नं. 44', 'मिस्टर कार्टून एम.ए.', 'घर संसार' और 'चार दिल चार राहें' जैसी फिल्मों में छोटे-बडे रोल किए। कुमकुम कहती हैं, 'एक्ट्रेस के तौर पर भी पहचान बनने लगी, तो मैंने डांस के साथ-साथ अदाकारी को भी संजीदा ढंग से लेना शुरू कर दिया और कम अर्से में ही हिंदी फिल्मों की बिजी हीरोइन बन गई।' साठ और सत्तर के दशक में कुमकुम ने 'तेल मालिश बूट पॉलिश', 'कर भला, 'मां', 'संसार', 'सन ऑफ इंडिया', 'मिस्टर एक्स इन बॉम्बे', 'दिल भी तेरा हम भी तेरे', 'ब्लैक कैट', 'कव्वाली की रात', 'किंगकांग', 'गंगा की लहरें', 'तू नहीं और सही', 'मैं वोही हूं', 'एक सपेरा एक लुटेरा' और 'धमकी' जैसी कई फिल्मों के साथ 'गंगा मइया तोहरे पियरी चढइबो', 'भौजी' और 'गंगा' जैसी भोजपुरी फिल्में भी बतौर हीरोइन कीं। 'गंगा' का निर्माण भी उन्होंने किया था। कुमकुम बताती हैं, '1973 में बनी 'जलते बदन' मेरी आखिरी फिल्म थी। इसके बाद लखनऊ के सज्जाद अकबर खान से मेरी शादी हुई और 1975 में उनके साथ मैं सऊदी अरब चली गई। हालांकि कई सालों में रूक-रूककर तैयार हुई 'बॉम्बे बाई नाइट' को मेरी आखिरी रिलीज फिल्म कहा जा सकता है, जो 1976 में रिलीज हुई थी। इस ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म में मेरे हीरो संजीव कुमार थे।'(शिशिरकृष्ण शर्मा,राजस्थान पत्रिका,10 जुलाई,2010)

3 comments:

  1. कुमकुम का सबसे अच्छा गीत मुझे मदर इंडिया का गीत "घूँघट नहीं खोलूंगी सैंया तेरे आगे" लगा ,वह अमर गीत है

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  2. कुमकुम का सबसे अच्छा गीत मुझे मदर इंडिया का गीत "घूँघट नहीं खोलूंगी सैंया तेरे आगे" लगा ,वह अमर गीत है

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